Tuesday, December 29, 2009

कविता


नव वर्ष की शुभकामनाएं

- सुश्री.डी अर्चन, चेन्‍नै

मन से नव दीप जलाओं
अज्ञान अंधकार को दूर भगाओं
नव वर्ष के नव सूरज की प्रभात किरण से
नव हर्ष की चेतना जगाओ
संघर्ष भरे जीवन को
तुम हॅंसते हुए सामना करों
कांटे भरे जीवन राहों पर
फूलों के वृंदावन सजाओं
सब बंदो में खुदा है
खुदा का करिश्‍मा सुनाओं
सब से गुज़ारिश है
हमेशा इनसानियत की मशाल जलाओं
कौमी एकता की मिसाल बताओं
इस नव वर्ष 2010 मेंनव हर्ष से सबका जीवन
उल्‍लास - उत्‍साह - समृद्वि व शांति से बीते ।

Friday, December 25, 2009

भारतीय हिंदी परिषद का अधिवेशन सुसंपन्न


युवा पीढ़ी को हिंदी के साथ जोड़ें - प्यारेलाल



दक्षिण भारत में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए हजारों हिंदी प्रेमियों ने योग दिया है । हिंदी के प्रचलन में तेजी के लिए यह जरूरी है कि आज हम युवा पीढ़ी को हिंदी के साथ जोड़ें । चेन्नई में भारतीय हिंदी परिषद के 38वाँ अधिवेशन के उद्घाटन के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित तमिलनाडु अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष प्यारेलाल पीतलिया ने यह वक्तव्य दिया । उन्होंने कहा कि आज तमिलनाडु में हिंदी का कोई विरोध नहीं है ।



चेन्नई में चेटपेट स्थित वर्ल्ड यूनिवर्सिटी सर्वीस सेंटर में भारतीय हिंदी परिषद, इलाहाबाद, तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी तथा भाषा संगम के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न इस साहित्यिक समारोह की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष प्रो. त्रिभुवननाथ शुक्ल ने की । उन्होंने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि हमारी भाषाएँ भले ही भिन्न-भिन्न हो किंतु पूरे भारतीय भाषाओं की मूलचिति एक ही है । आज इंटरनेट के युग में हमारी भारतीय भाषाओं का जो साहित्य पुस्तकालयों की अलमारियों में बंद पड़े थे, वे सभी विश्व स्तर पर इंटरनेट के माध्यम से पाठकों के सामने आ चुके हैं । इस अवसर दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान के कुलसचिव प्रो. दिलीप सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत में भाषाई संघर्ष जैसी कोई स्थिति नहीं है, हमारा नारा भारतीयता की सिद्धि की हो, तमाम भारतीय भाषाओं से एक ही स्वर निकलता है ।



इस समारोह में तमिलनाडु के अलावा देश के विभिन्न प्रदेशों से पधारे हिंदी साहित्यकारों, विद्वानों ने भागीदारी ली। उद्घाटन कार्यक्रम के अवसर पर श्रीमती अवतार कौर विरदी ने प्रार्थना के पश्चात् तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी की महासचिव डॉ. मधुधवन ने अतिथियों का स्वागत किया । कार्यक्रम का संचालन परिषद के साहित्य मंत्री डॉ. वीरेंद्र नारायण यादव ने किया ।


पुस्तक विमोचन तथा हिंदी सेवियों का सम्मान


उद्घाटन सत्र में डॉ. शेषन की सात पुस्तकों का तथा निर्मला अग्रवाल एवं रमेशगुप्त नीरद की एक पुस्तक का लोकार्पण मुख्य अतिथि प्यारेलाल पीतलिया के करकमलों से किया गया । इसी अवसर हिंदी सेवियों का सम्मान भी किया गया, सम्मानितों में श्रीमती कामाक्षी, डॉ. शांतिमोहनन्, डॉ. हृदयनारायण पांडेय, डॉ. बशीर अहमद, टी.ई.एस. राघवन, ईश्वरचंद्र झा, डॉ. सुंदरम, डॉ. रवींद्र कुमार सेठ, डॉ. मधुधवन और डॉ. शेषा रत्नम शामिल हैं ।


परिसंवाद एवं काव्य-गोष्ठी


इस दो दिवसीय समारोह में हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के अंतः संबंधों पर परिसंवाद संपन्न हुआ । काव्य, कथा साहित्य, नाटक, आलोचना, लोक साहित्य और प्रयोजनमूलक हिंदी पर केंद्रित आलेख विद्वानों द्वारा प्रस्तुत किए गए । इस अवसर पर काव्य-गोष्ठी भी आयोजित हुई थी । गोष्ठी में प्रस्तुत हस्य-श्रृंगार एवं व्यंग्य कविताओं का स्वागत श्रोताओं ने करताल ध्वनियों से किया ।


समापन समारोह


समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एस.एस. कुशवाहा ने कहा कि हिंदी के विकास में तेजी लाने की जरूरत है । समापन समारोह में विभिन्न प्रदेशों से पधारे पत्रकारों तथा विद्वानों का सम्मान किया गया ।

Thursday, December 24, 2009

क्रिसमस की शुभकामनाएँ Happy Chritmas



'बड़ा दिन'


संजीव 'सलिल'


हम ऐसा कुछ काम कर सकें

हर दिन रहे बड़ा दिन अपना.

बनें सहायक नित्य किसी के-

पूरा करदें उसका सपना.....
*
केवल खुद के लिए न जीकर

कुछ पल औरों के हित जी लें.

कुछ अमृत दे बाँट, और खुद

कभी हलाहल थोडा पी लें.

बिना हलाहल पान किये, क्या

कोई शिवशंकर हो सकता?

बिना बहाए स्वेद धरा पर

क्या कोई फसलें बो सकता?

दिनकर को सब पूज रहे पर

किसने चाहा जलना-तपना?

हम ऐसा कुछ काम कर सकें

हर दिन रहे बड़ा दिन अपना.....
*

निज निष्ठा की सूली पर चढ़,

जो कुरीत से लड़े निरंतर,

तन पर कीलें ठुकवा ले पर-

न हो असत के सम्मुख नत-शिर.

करे क्षमा जो प्रतिघातों को

रख सद्भाव सदा निज मन में.

बिना स्वार्थ उपहार बाँटता-

फिरे नगर में, डगर- विजन में.

उस ईसा की, उस संता की-

'सलिल' सीख ले माला जपना.

हम ऐसा कुछ काम कर सकें

हर दिन रहे बड़ा दिन अपना.....
*

जब दाना चक्की में पिसता,

आटा बनता, क्षुधा मिटाता.

चक्की चले समय की प्रति पल

नादां पिसने से घबराता.

स्नेह-साधना कर निज प्रतिभा-

सूरज से कर जग उजियारा.

देश, धर्म, या जाति भूलकर

चमक गगन में बन ध्रुवतारा.

रख ऐसा आचरण बने जो,

सारी मानवता का नपना.

हम ऐसा कुछ काम कर सकें

हर दिन रहे बड़ा दिन अपना.....

*

(भारत में क्रिसमस को 'बड़ा दिन' कहा जाता है.)

मीडिया और भाषा पर परिसंवाद

मीडिया की भाषा आँख खोलने वाली होनी चाहिएः व्यास


उदयपुर । मीडिया की भाषा आँख खोलने वाली होनी चाहिए जिसे हमारे मनीषियों ने पश्यन्ती कहा है। ऐसी भाषा जो जन सामान्य की अभिरुचि को सुसंस्कृत करे और उन्हें सजग बनाए। सुपरिचित कवि-आलोचक डॉ. सत्यनारायण व्यास ने ’मीडिया और भाषा’ विषयक परिसंवाद में उक्त विचार व्यक्त किए। जनार्दराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के मीडिया अध्ययन केन्द्र द्वारा आयोजित इस परिसंवाद में डॉ. व्यास ने कहा कि मीडिया की शब्द रचना के केन्द्र में संवेदना होनी चाहिए क्यों कि संवेदना का मूल मानवीय करूणा है। उन्होंने मीडिया और साहित्य की बढ़ती दूरी को चिन्ताजनक बताते हुए कहा कि भूलना नहीं चाहिए कि प्रेमचन्द, माखनलाल चतुर्वेदी और रघुवीर सहाय ने मीडिया की भाषा को साहित्य के संस्कार दिये हैं। अजमेर विजयसिंह पथिक श्रमजीवी महाविद्यालय के प्राचार्य और कवि डॉ. अनन्त भटनागर ने कहा कि मीडिया में भाषा के स्तर पर हुए स्खलन ने हमारी सामाजिक चेतना को प्रभावित किया है। उन्होंने कुछ चर्चित विज्ञापनों की भाषा का उल्लेख कर स्पष्ट किया कि बाजार की शक्तियां भाषा को संवेदनहीन बना ग्लेमर से जोड़ती है। डॉ. भटनागर ने कहा कि सचेत पाठक वर्ग हस्तक्षेप कर भाषा के दुरूपयोग को रोक सकता है। प्रभाष जोशी जैसे पत्रकारों के अवदान को रेखांकित कर उन्होंने बताया कि हिन्दी में लोक का मुहावरा अपनाकर मीडिया की भाषा को व्यापक जन सरोकारों से जोड़ा जा सकता है। परिसंवाद में राजस्थान विद्यापीठ के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. हेमेन्द्र चण्डालिया ने नयी प्रौद्योगिकी के कारण मीडिया में आए बदलावों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी निरपेक्ष नहीं होती, वह अपने साथ अपनी संस्कृति को लाती है जो मीडिया की भाषा और मुहावरे को भी बदलने का काम करती है। प्रो. चण्डालिया ने भाषा और समाज के सम्बन्धों की ऐतिहासिक सन्दर्भ में व्याख्या कर बताया कि समाज का चरित्र भाषा को निर्धारित करता है।
इससे पहले मीडिया अध्ययन केन्द्र के समन्वयक डॉ. पल्लव ने परिसंवाद की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि मीडिया के चरित्र को समझने के लिए भाषा की संरचना और प्रयोग का विश्लेषण बेहद आवश्यक है। केन्द्र के अध्यापक आशीष चाष्टा ने केन्द्र की गतिविधियों की जानकारी दी एवं अतिथियों का स्वागत किया। परिसंवाद में केन्द्र के विद्यार्थियों मनोज कुमार, निखिल ने विषय-विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया। आयोजन में डॉ. मलय पानेरी, डॉ. मुकेश शर्मा, डॉ. योगेश मीणा, एकलव्य नन्दवाना सहित विद्यार्थी, शोध छात्र और अध्यापक उपस्थित थे। अन्त में केन्द्र की छात्रा मंजु जैन ने आभार प्रदर्शित किया।

Monday, December 21, 2009

चेन्नई में दो दिवसीय राष्ट्रीय हिंदी अधिवेशन

भारतीय हिंदी परिषद, इलाहबाद, तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी तथा भाषा संगम चेन्नई के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 22 व 23 दिसंबर, 2009 को दो दिवसीय राष्ट्रीय हिंदी अधिवेशन का आयोजन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी सर्वीस सेंटर, चेटपेट, चेन्नई में किया जा रहा है । अधिवेशन में चर्चा का विषय है – हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के अंतर्संबंध ।

Wednesday, December 16, 2009

नवगीत

नव गीत : संजीव 'सलिल'

ओढ़ कुहासे की चादर,
धरती लगाती दादी.
ऊँघ रहा सतपुडा,
लपेटे मटमैली खादी...

सूर्य अँगारों की सिगडी है,
ठण्ड भगा ले भैया.
श्वास-आस संग उछल-कूदकर
नाचो ता-ता थैया.
तुहिन कणों को हरित दूब,
लगती कोमल गादी...

कुहरा छाया संबंधों पर,
रिश्तों की गरमी पर.
हुए कठोर आचरण अपने,
कुहरा है नरमी पर.
बेशरमी नेताओं ने,
पहनी-ओढी-लादी...

नैतिकता की गाय काँपती,
संयम छत टपके.
हार गया श्रम कोशिश कर,
कर बार-बार अबके.
मूल्यों की ठठरी मरघट तक,
ख़ुद ही पहुँचा दी...

भावनाओं को कामनाओं ने,
हरदम ही कुचला.
संयम-पंकज लालसाओं के
पंक-फँसा, फिसला.
अपने घर की अपने हाथों
कर दी बर्बादी...

बसते-बसते उजड़ी बस्ती,
फ़िर-फ़िर बसना है.
बस न रहा ख़ुद पर तो,
परबस 'सलिल' तरसना है.
रसना रस ना ले, लालच ने
लज्जा बिकवा दी...

हर 'मावस पश्चात्
पूर्णिमा लाती उजियारा.
मृतिका दीप काटता तम् की,
युग-युग से कारा.
तिमिर पिया, दीवाली ने
जीवन जय गुंजा दी...
*****
प्रेषक: आचार्य संजीव 'सलिल', संपादक दिव्य नर्मदा
ई मेल;
सलिल.संजीव@जीमेल.कॉम

Monday, December 14, 2009

लघुकथा

वन्देमातरम

- आचार्य संजीव 'सलिल'


-'मुसलमानों को 'वन्दे मातरम' नहीं गाना चाहिए, वज़ह यह है की इस्लाम का बुनियादी अकीदा 'तौहीद' है। मुसलमान खुदा के अलावा और किसी की इबादत नहीं कर सकता।' -मौलाना तकरीर फरमा रहे थे।

'अल्लाह एक है, वही सबको पैदा करता है। यह तो हिंदू भी मानते हैं। 'एकोहम बहुस्याम' कहकर हिंदू भी आपकी ही बात कहते हैं। अल्लाह ने अपनी रज़ा से पहले ज़मीनों-आसमां तथा बाद में इन्सान को बनाया। उसने जिस सरज़मीं पर जिसको पैदा किया, वही उसकी मादरे-वतन है। अल्लाह की मर्जी से मिले वतन के अलावा किसी दीगर मुल्क की वफादारी मुसलमान के लिए कतई जायज़ नहीं हो सकती। अपनी मादरे-वतन का सजदा कर 'वंदे-मातरम' गाना हर मुसलमान का पहला फ़र्ज़ है। हर अहले-इस्लाम के लिए यह फ़र्ज़ अदा करना न सिर्फ़ जरूरी बल्कि सबाब का काम है। आप भी यह फ़र्ज़ अदा कर अपनी वतन-परस्ती और मजहब-परस्ती का सबूत दें।' -एक समझदार तालीमयाफ्ता नौजवान ने दलील दी।

मौलाना कुछ और बोलें इसके पेश्तर मजामीन 'वन्दे-मातरम' गाने लगे तो मौलाना ने चुपचाप खिसकने की कोशिश की मगर लोगों ने देख और रोक लिया तो धीरे-धीरे उनकी आवाज़ भी सबके साथ घुल-मिल गयी।

******

Friday, December 11, 2009

राष्ट्रीय संगोष्ठी

पांडिच्चेरी में दि.31 जनवरी, 2009 को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

Thursday, December 3, 2009

श्रद्धांजलि

हमारा सलाम

- श्री मनमोहन करकेरा

राजीव तुम्‍हारे नमन* को हमारा सलाम
सरस्‍वत रचना को शत शत प्रणाम।
शायद हम तुम्‍हें खो गए उस 26/11 की दर्दनाक रात
लेकिन तुम फिर प्रकट हो गए नमन के साथ।
तुम्‍हारा मधुर मुस्‍कान क्‍या हम भूल पाएंगे ?
नहीं! कभी नहीं ! ! हरगि़ज नहीं ! ! !
तुम हर बार हमें याद आओगे।
तुम्‍हारी कविताओं में तुम्‍हारा ओजस्‍वी चेहरा नज़र आता है,
तुम्‍हारे संग बीते यादों को ताज़ा करता है,
आसुओं से दिल व आखों को भिगोता है !
तुम्‍हारी खट्ठी मीठी यादें नही होंगे जुदा
तुम्‍हारी क्रियाशीलता, समर्पण, तेजस्‍वी व्‍यक्तिव हमें याद आएंगे सदा।

किसी ने सही कहा है कि “कलाकार को अच्‍छा नहीं लगता कोई एक चमन”
इस लिए इस मतलबी व झूठी धरती छोड कर बनगयें फरिस्‍ता -ए -अमन ! !
तुम से बडा कलाकार नही देखा हमने, इस ज़माने में।
शान - शोहरत, मुहब्‍बत के पैमाने में
हम ज़माने वाले हर रोज याद करते रहेंगे आप को
दुवा देतें रहेंगे फूलों के अर्पण से आप की पुण्‍यात्‍मा को,
तुम सदा अमर रहो,उस जहां में
स्‍वीकार करे हमारा नमन, इस जहां से।
===================
*नमन - स्‍वर्गीय राजीव सारस्‍वत का काव्‍य संग्रह

Tuesday, December 1, 2009

राजभाषा कार्यान्वयन हमारा दायित्व है - बी.एस.वी. शर्मा



कोयंबत्तूर नगर राजभाषा कार्यान्वयन समति की अर्द्ध-वार्षिक बैठक एवं हिंदी दिवस समारोह संपन्न



कोयंबत्तूर नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति की अर्द्ध-वार्षिक बैठक एवं हिंदी दिवस समारोह दि.1 दिसंबर, 2009 को सुसंपन्न हुआ । बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष श्री बी.एस.वी. शर्मा, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने की । बैठक का शुभारंभ श्रीमती ए. चित्रा के प्रार्थना गीत से हुआ । समिति के सदस्य-सचिव एवं कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के सहायक निदेशक (राजभाषा) डॉ. सी. जय शंकर बाबु ने सभी अधिकारियों तथा प्रतिनिधियों का स्वागत किया और समिति की गतिविधियों का परिचय दिया ।
समिति के अध्यक्ष श्री बी.एस.वी. शर्मा जी ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि राजभाषा के रूप में हिंदी के प्रगामी प्रयोग को बढ़ावा देना हमारा दायित्व है । अपने-अपने विभाग, कार्यालय के मूल कार्यों करने को हम जितना महत्व देते है, राजभाषा कार्यान्वयन को भी उतना ही महत्व दिया जाए । उन्होंने कहा कि कोयंबत्तूर नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति अपने उद्देश्यों एवं कार्यों में काफ़ी सक्रिय है एवं राजभाषा कार्यान्वयन की दिशा में सामयिक चेतना के साथ गतिशील है । सरकारी कार्यालयों में हिंदी सीखने के लिए कई अवसर व सुविधाएँ मिलती हैं । इनका लाभ उठाते हुए सबको हिंदी सीखना चाहिए । उन्होंने कुछ प्रेरक उदाहरण देते हुए बताया कि भाषाओं को आसानी से किस तरह सीखी जा सकती हैं और भाषाओं के ज्ञान से कार्यसाधन में कितनी सुविधा होती है । हिंदी फिल्मों के माध्यम से भी हिंदी के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है और फिल्मों के नामों और गानों से भी कई हिंदीतर भाषी हिंदी सीख रहे हैं । कार्यालय अध्यक्षों से उन्होंने अनुरोध किया कि वे अपने कार्यालय में हिंदी कार्यान्वयन में उचित नेतृत्व का वहन करें, अच्छी शुरूआत करते हुए अपने स्टॉफ को हिंदी सीखने के अवसर प्रदान करें जिससे उन्हें हिंदी में कार्य करने की अच्छी प्रेरणा भी मिल जाएगी । हिंदी सीखने वालों से हिंदी में काम भी लिया जाए ।
अंत में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति की गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए उन्होंने सभी कार्यालय अध्यक्ष के प्रति आभार ज्ञापन किया तथा वार्षिक पुरस्कार विजेता कार्यालयों, नराकास हिंदी माह के अवसर पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को बधाई दी ।
सदस्य-सचिव डॉ. सी. जय शंकर बाबु ने बताया कि हर वर्ष मई तथा अक्तूबर महीनों में संपन्न होनेवाली समिति की अर्द्ध-वार्षिक बैठकों में कार्यालय प्रधानों का उपस्थित होना तथा समीक्षार्थ राजभाषा कार्यान्वयन की अर्द्ध-वार्षिक रिपोर्ट समिति को समय पर प्रस्तुत करना आवश्यक है । राजभाषा नियम, 1976 के नियम 12 के अनुसार कार्यालय में राजभाषा कार्यान्वयन का दायित्व कार्यालय प्रधान का होता है । उन्हें अपने दयित्व को पूरी निष्ठा के साथ निभाने की दिशा में आपसी विचार-विमर्श के लिए एक संयुक्त मंच के रूप में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति की विशिष्ट भूमिका रहती है । राजभाषा कार्यान्वयन में आनेवाली कठिनाइयों के संबंध में अपेक्षित मार्गदर्शन भी बैठक में प्राप्त किया जा सकता है । उन्होंने कहा कि कोयंबत्तूर नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति की विशिष्टता यह है कि सूचना प्रौद्योगिकी का लाभ उठाते हुए समिति द्वारा अद्यतन सूचनाएँ समिति के कार्यालयों को दी जाती हैं । समिति का वेबसाइट भी समय पर अपडेट किया जाता है । बैठक के दिन ही बैठक की पूरी कार्यवाही वेबसाइट में प्रकाशित करनेवाली यह एकमात्र समिति है ।
सदस्य-कार्यालयों के उपयोगार्थ राजभाषा साधन के नाम से सी.डी. बनाकर वितरित किया गया है जिसमें राजभाषा कार्यान्वयन में उपयोगी कई महत्वपूर्ण साधन शामिल किए गए हैं । समिति द्वारा आयोजित सूचना प्रौद्योगिकी कार्यशालाओं द्वारा कंप्यूटरों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा मिला है ।
सदस्य-सचिव ने यह भी जानकारी दी कि हिंदी शिक्षण योजना का लाभ उठाते हुए कार्यालय के स्टॉफ को हिंदी भाषा, टंकण एवं आशुलिपि प्रशिक्षण दिलवाया जाए । नियमित कक्षाओं में किसी करणवश किन्हीं स्टॉफ सदस्यों को शामिल नहीं किया जा सकता तो उन्हें पत्रचार प्रशिक्षण अथवा राजभाषा विभाग के पोर्टल के माध्यम से चलाए जा रहे लीला प्रबोध प्रवीण एवं प्राज्ञ ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के मध्यम से प्रशिक्षण दिलवाया जा सकता है । राजभाषा विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कंप्यूटरों में हिंदी के प्रयोग बढ़ाने पर भी उन्होंने बल दिया और सभी कार्यालय अध्यक्षों से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि कंप्यूटर पर प्रयोग में लाए जाने वाले पत्रशीर्ष को अनिवार्यतः द्विभाषी रूप में प्रयोग में लाए जा रहे हैं ।
तदनंतर सदस्य कार्यालयों में राजभाषा कार्यान्वयन की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई । बैठक में चर्चित महत्वपूर्ण मद इस प्रकार हैं –
Ø हिंदी शिक्षण योजना के अगले सत्र में प्रशिक्षणार्थ स्टॉफ को नामित करने के संबंध में चर्चा की गई । हिंदी प्राध्यापक से इस संबंध में पूरी जानकारी दी गई । सदस्य-सचिव ने कहा कि सरकारी आदेशानुसार प्रशिक्षण के लिए शेष पदधारियों में से 20 प्रतिशत पदधारियों को नामित किया जाए और 2015 तक प्रशिक्षण पूरा किया जाए । दिसंबर, 2009 के तीसरे सप्ताह तक प्रशिक्षणार्थ नामित पदधारियों की सूची हिंदी शिक्षण योजना के सर्व-कार्यभारी अधिकारी / नराकास कार्यालय को भेजी जाए । कार्यालय अध्यक्षों से यह भी अनुरोध किया गया कि वे हिंदी भाषा प्रशिक्षण हेतु नामित पदधारियों से यह सुनिश्चित करें कि वे कक्षाओं में नियमित रूप से उपस्थित रहकर, परीक्षा में अनिवार्यतः शामिल होकर प्रशिक्षण सफलता पूरा कर रहे हैं ।
Ø हिंदी टंकण एवं आशुलिपि प्रशिक्षण की सुविधा सुनिश्चित करने हेतु रिक्त सहायक निदेशक (टंकण एवं आशुलिपि) पद तैनाती होने की जानकारी समिति को दी गई और अगले सत्र में पदधारियों को नामित करने का अनुरोध कार्यालय अध्यक्षों से किया गया ।
Ø समिति की ओर से नियमित रूप से कोयंबत्तूर में कंप्यूटर प्रशिक्षण कार्यशालाएँ आयोजित की जाएंगी ।
Ø सभी कार्यालयों में राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3) में निर्धारित 14 प्रकार के दस्तावेज द्विभाषी रूप में जारी करना सुनिश्चित किया जाना चाहिए ।
Ø राजभाषा विभाग द्वारा वार्षिक कार्यक्रम में ‘ग’ क्षेत्र में पत्राचार के लिए निर्धारित लक्ष्य 55 प्रतिशत हासिल करने हेतु प्रयास किया जाए ।
Ø राजभाषा नियम, 1976 के नियम-11 का अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु सभी रबड़ मुहरें तथा कार्यालय के नामपट्ट, सूचना पट्ट आदि नियमानुसार द्विभाषी / त्रिभाषी रूप में बनवाना सुनिश्चित किया जाए ।
Ø राजभाषा विभाग द्वारा वर्ष 2009-10 के लिए जारी वार्षिक कार्यक्रम में निर्धारित सभी लक्ष्य हासिल करने हेतु प्रयास किया जाए ।
Ø समिति की पत्रिका तथा सदस्य-निर्देशिका का प्रकाशन यथाशीघ्र किया जाए । सदस्य-निर्देशिका प्रकाशन में अपेक्षित सूचना एकत्रित करने हेतु समिति का कार्यदल सदस्य-कार्यालयों का दौरा करेगा । निर्देशिक के प्रकाशन के पंद्रह दिन पूर्व मसौदे का प्रकाशन वेबसाइट में किया जाएगा ।
बैठक की कार्यवाही समाप्त होने के बाद हिंदी दिवस समारोह मनाया गया । राजभाषा कार्यान्वयन में श्रेष्ठ कार्य-निष्पादन हेतु वार्षिक पुरस्कारों का वितरण समिति के अध्यक्ष श्री बी.एस.वी. शर्मा एवं अन्य कार्यालय अध्यक्षों के कर कमलों से किया गया । पुरस्कार वितरित करनेवाले कार्यालय अध्यक्षों में श्री एम.आर. वासुदेव, विमानपत्तन निदेशक, जे. कमलनाथन, निदेशक, आकाशवाणी, श्री जी. भास्कर, निदेशक, भारतीय मानक ब्यूरो, श्री जी. मुरलीधरन, महाप्रबंधक, भारत संचार निगम लिमिटेड, डॉ. ना. गोपालकृष्णन, परियोजना समन्वयन (कपास) एवं अध्यक्ष, केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान, श्री डी. कन्नन, कमांडेंट, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, रा. गोपाल कृष्णन, वेयर हाऊस प्रबंधक, श्री वी.के. सिन्हा, शाखा प्रबंधक, भारतीय कपास निगम लिमिटेड, श्री सी.एन. रवींद्रनाथ, संयुक्त निदेशक, श्री क्यू. मोहियुद्दीन, प्रबंधक, भारत सरकार मुद्रणालय, श्री जी.के.के.वी. उमाशंकर, वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड, श्री पी.एस. चंदन, शाखा प्रबधक, हडको, श्री एम. सेल्वराज, स्टेशन प्रबंधक, एयर इंडिया, श्री के. नल्लप्पन, प्राचार्य, केंद्रीय विद्यालय, डॉ. एम. राजेश्वरी, प्रधानाचार्या, केंद्रीय विद्यालय, सूलूर, श्री सुदर्शन मलिक, मुख्य प्रबंधक, राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम लिमिटेड, श्री एम.एम. चोक्कलिंगम, मुख्य महाप्रबंधक (तकनीकी), नेशनल टेक्सटाइल कार्पोरेशन लिमिटेड, श्री पी. दुरैसामी, अधीक्षक, डाक भंडार डिपो, श्री पी. राजगोपालन, कंपनी पंजीयक, श्री जी. गुरुनाथन, वरिष्ठ डाकघर अधीक्षक, श्री एम.एम. रामलिंगम, वरिष्ठ क्षेत्र अधिकारी, श्री एम.के. गोगोई, शाखा प्रबंधक, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड, श्रीमती के. उषा, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, गन्ना प्रजनन संस्थान आदि शामिल हैं ।
सरकारी कार्यालय वर्ग में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन एवं कर्मचारी राज्य बीमा निगम को विशिष्ट पुरस्कार, केंद्रीय विद्यालय, सूलूर को प्रथम पुरस्कार, एस एंड टी कर्मशाला को द्वितीय पुरस्कार तथा केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान को तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए ।
इनके अलावा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, केंद्रीय विद्यालय, कंपनी पंजीयक का कार्यालय, आयकर कार्यालय, गन्ना प्रजनन संस्थान, केंद्रीय श्रमिक शिक्षा बोर्ड और संयुक्त महानिदेशक विदेश व्यापार कार्यालय को शंसा पत्र प्रदान किए गए ।
सरकारी उपक्रम वर्ग के अंतर्गत नेशनल टेक्सटाईल कार्पोरेशन लिमिटेड एवं भारतीय कपास निगम लिमिटेड को विशिष्ट पुरस्कार, भारत संचार निगम लिमिटेड को प्रथम पुरस्कार, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को द्वितीय पुरस्कार तथा भारतीय खाद्य निगम को तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए ।
इनके अलावा राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड, क्षेत्रीय कार्यालय, युनाइटेड इंडिया एश्योरेंस कं.लि., स्पैसेस बोर्ड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड के इरुगूर इंस्टलेशन को शंसा पत्र प्रदान किए गए ।
श्रेष्ठ राजभाषा पत्रिकाओं के लिए दिए जाने वाले वार्षिक पुरस्कारों के अंतर्गत सरकारी कार्यालय वर्ग में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा प्रकाशित कोंगु निधि को प्रथम पुरस्कार, आयकर कार्यालय द्वारा प्रकाशित आयकर प्रसून को द्वितीय पुरस्कार, केंद्रीय विद्यालय, सूलूर द्वारा प्रकाशित विद्यालय पत्रिका के लिए तृतीय पुरस्कार तथा सरकारी उपक्रम वर्ग में भारत संचार निगम लिमिटेड द्वारा प्रकाशित अमृतवाणी को प्रथम पुरस्कार एवं युनाइटेड इंडिया इंश्यूरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा प्रकाशित सिरुवाणी को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किए गए ।
बैठक में विमानपत्तन निदेशक श्री वासुदेव, राष्ट्रीय हथकरघा निगम के वरिष्ठ प्रबंधक श्री मलिक, स्पैसेस बोर्ड के प्रधान श्री रामलिंगम, नेशनल टेक्सटाइल कार्पोरेशन लिमिटेड को मुख्य महाप्रबंधक श्री एम. चोक्कलिंगम, सहायक प्रबंधक (राजभाषा) श्री यू,एन. त्रिपाठी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक श्री उमाशंकर, गन्ना प्रजनन संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. चंद्रगुप्ता आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए ।
समिति के द्वारा आयोजित हिंदी सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कारों का वितरण किया गया । अंत में सदस्य-सचिव डॉ. सी. जय शंकर बाबु द्वारा धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ ही बैठक सुसंपन्न हुई।

Monday, November 30, 2009

तरुण विजय की हिंदी पुस्तक भारत – नियति और संघर्ष का विमोचन

1 दिसंबर, 2009 को तरुण विजय की हिंदी पुस्तक भारत – नियति और संघर्ष का विमोचन

मंगलवार 1 दिसंबर, 2009 शाम 5 बजे त्रिवेणी सभागार, मंडी हाउस, तानसेन मार्ग के पास, नई दिल्ली में भारत के भाग्य और आगे संघर्ष के बारे में एक चर्चा आयोजित की गई है, इसी अवसर पर तरुण विजय की लेखनी से निःसृत भारत – नियति और संघर्ष पुस्तक का विमोचन भी संपन्न होगा । मुख्य अतिथि श्री दत्तात्रेय Hosbale, Sah Sarkaryawah (संयुक्त जनरल Secy.), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ.विशिष्ट पैनलश्री नरेन्द्र कोहली, प्रख्यात साहित्यकारश्री दीवान सैयद ताहिर Nizami, Sajjada Nashin, दरगाह, हजरत निजामुद्दीन Auliaश्री राहुल देव के मुख्य संपादक, CNEB समाचार चैनलश्रीमती. Chandrakanta, लेखक, कश्मीर नोटश्री विक्रम दत्त, सामाजिक कार्यकर्ता और विचारकश्री अभय महाजन, org. Secy., दीन दयाल शोध संस्थान, चित्रकूट
A discussion on India’s destiny and the struggles ahead has been organized on the occasion of the launch of Tarun Vijay’s Hindi book titled Bharat-Niyati Aur Sangharsh on 1st December, 2009, Tuesday at 5 pm at Triveni Auditorium, near Mandi House, Tansen Marg, New Delhi.
Chief Guest—Shri Dattatreya Hosbale, Sah Sarkaryawah (Jt, Gen Secy.), RSS.
Distinguished Panelists
Shri Narendra Kohli, noted littérateur
Shri Dewan Syed Tahir Nizami, Sajjada Nashin, Dargah, Hazrat Nizamuddin Aulia
Shri Rahul Dev, Chief editor, CNEB News Channel
Smt. Chandrakanta, noted author, Kashmir
Shri Vikram Dutt, social activist and thinker
Shri Abhay Mahajan, Org. Secy., Deen Dayal Research Institute, Chitrakoot

Thursday, November 19, 2009

कविता



मेरा घर



- निर्मल एम. रांका, कोयंबत्तूर



अणुव्रत एक ऐसा घर बनाना चाहता है
जिसकी नींव में नैतिकता हो
जिसमें संयम की सिमेंट लगी हो
प्रामाणिक पत्थरों से निर्मित हुआ हो
जिसकी छत चरित्र से ढकी हुई हो
जो घर आचार-विचार के खंभों पर खड़ा हो
उस घर के दरवाजे सबके लिए खुले हो
खिड़खियों से अणुव्रत गीतों की स्वर लहरी गूंजती हो
घर की दीवारों पर प्रेक्षाध्यान व जीवन विज्ञान के चित्र हो
घर में पीने के लिए गंगा यमुना का पानी हो
खेत खलिहान में उपजा हुआ शुद्ध अन्न का भोजन हो
चारों तरफ़ हरियाली हो
जिस पर शांति और अहिंसा की वर्षा हो
सादा जीवन उच्च विचार उसका श्रृंगार हो
ऐसा मेरा घर हो ।

Monday, November 16, 2009

ASCII/ISCII TO UNICODE CONVERTER - VERSION 1.0.8.0

प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक का नया Version 1.0.8.0 जारी


विदिशा जिला, मध्य प्रदेश के निवासी श्री जगदीप सिंह दांगी की अनूठी प्रतिभा से विकसित प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक नया Version 1.0.8.0 का हाल विमोचन किया गया है । श्री दांगी जी का दावा है कि यह परिवर्तक लगभग 177 तरह के विभिन्न प्रचलित साधारण देवनागरी फ़ॉन्ट्स को 100% शुद्धता के साथ यूनिकोड आधारित फ़ॉन्ट मंगल में परिवर्तन के लिए एक अनूठा सॉफ़्टवेयर है। यह सॉफ़्टवेयर जटिल से जटिल शब्दों को जिनमें नुक़्ता और अर्द्ध ‘‘र्’’ का कितना ही जटिल संयोजन क्यों न हो Symbol Table से लिये हुए संयुक्ताक्षर युक्त पाठ को भी पूरी शुद्धता के साथ परिवर्तन करने में पूर्ण सक्षम है।
TBIL font convertor हो या अन्य कोई और भी वह सभी नुक़्तायुक्त, अर्द्ध‘‘र्’’ युक्त और Symbol Table से लिये हुए संयुक्ताक्षर युक्त पाठ को यूनिकोड करने में पूर्णतः असमर्थ हैं। परन्तु शुद्धता के मामले में और बहुत अधिक फ़ॉन्ट को परिवर्तन करने की दृष्टि से अभी तक प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक के सामने तमाम परिवर्तक कमज़ोर हैं। प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक का नया Version 1.0.8.0 का परीक्षण प्रति प्राप्त करने के लिए कृपया
इस लिंक पर क्लिक करें

फ़ॉन्ट लिस्ट- हिन्दी,मराठी और संस्कृत के फ़ॉन्ट्स के यूनिकोड परिवर्तन के
लिए प्रखर देवनागरी परिवर्तक की फ़ॉन्ट सूची-

1.) 4CBabu {४सीबाबू}
2.) 4CGandhi {४सीगाँधी}
3.) AARitu {आऋतु}
4.) AARituCompare {आऋतुकमपेयर}
5.) AARituPlus {आऋतुप्लस}
6.) AARituPlus2-Numbers {आऋतुप्लस२-नम्बर्स}
7.) AARituPlus2 {आऋतुप्लस२}
8.) Agra {आगरा}
9.) Agra Thin {आगरा थिन}
10.) Ajay Normal {अजय नॉर्मल}
11.) AkLitePriya {एकेलाईटप्रिया}
12.) AkrutiDevWeb {अकृतिदेववेब}
13.) AkrutiOfficePriya {अकृतिऑफिसप्रिया}
14.) APS-DV-Priyanka {एपीएस-डीवी-प्रियंका}
15.) Arjun {अर्जुन}
16.) Aryan2 {आर्यन २}
17.) AU {अमर उजाला}
18.) BF_Devanagari {बीएफ_देवनागरी}
19.) Bhaskar {भास्कर}
20.) BRH Devanagari {बरहा देवनागरी}
21.) Chanakya {चाणक्य}
22.) Chanakya {चाणक्य} : (Type1 Font)
23.) Chandini {चाँदनी}
24.) ChandiniE {चाँदनीइ}
25.) Devanagari {देवनागरी}
26.) Devanagari New {देवनागरी न्यू}
27.) DevLys 010 {देवलिस ०१०}
28.) DevLys 020 {देवलिस ०२०}
29.) DevLys 020 Thin {देवलिस ०२० थिन}
30.) DevLys 030 {देवलिस ०३०}
31.) DevLys 110 {देवलिस ११०}
32.) Devmarathi {देवमराठी}
33.) Divyansh {दिव्याँश}
34.) DV-TTAakash {डीवी-टीटी आकाश}
35.) DV-TTBhima {डीवी-टीटी भीमा}
36.) DV-TTGanesh {डीवी-टीटी गणेश}
37.) DV-TTGaneshEN {डीवी-टीटी गणेश इएन}
38.) DV-TTManohar {डीवी-टीटी मनोहर}
39.) DV-TTMayur {डीवी-टीटी मयूर}
40.) DV-TTNatraj {डीवी-टीटी नटराज}
41.) DV-TTRadhika {डीवी-टीटी राधिका}
42.) DV-TTSurekh {डीवी-टीटी सुरेख}
43.) DV-TTSurekhEN {डीवी-टीटी सुरेख इएन}
44.) DV-TTVasundhara {डीवी-टीटी वसुन्धरा}
45.) DV-TTYogesh {डीवी-टीटी योगेश}
46.) DV-TTYogeshEN {डीवी-टीटी योगेश इएन}
47.) DV_Divyae {डीवी-दिव्या:}
48.) DV_ME_Shree.... {डीवी_एमइ_श्री....}
49.) DVB-TTSurekh {डीवीबी-टीटी सुरेख}
50.) DVB-TTSurekhEN {डीवीबी-टीटी सुरेख इएन}
51.) DVB-TTYogesh {डीवीबी-टीटी योगेश}
52.) DVB-TTYogeshEN {डीवीबी-टीटी योगेश इएन}
53.) DVBW-TTSurekh {डीवीबीडब्ल्यू-टीटी सुरेख}
54.) DVBW-TTYogeshEN {डीवीबीडब्ल्यू-टीटी योगेश इएन}
55.) DVBW Surekh Avid {डीवीबीडब्ल्यू सुरेख ऐविड}
56.) DVW-TTSurekh {डीवीडब्ल्यू-टीटी सुरेख}
57.) DVW-TTYogeshEN {डीवीडब्ल्यू-टीटी योगेश इएन}
58.) ePatrika {ईपत्रिका}
59.) GIST-DVTTAjay {जिस्ट-डीवीटीटी अजय}
60.) GIST-DVTTAniket {जिस्ट-डीवीटीटी अनिकेत}
61.) GIST-DVTTAnjali {जिस्ट-डीवीटीटी अंजली}
62.) GIST-DVTTBrinda {जिस्ट-डीवीटीटी ब्रिंदा}
63.) GIST-DVTTDhruv {जिस्ट-डीवीटीटी ध्रुव}
64.) GIST-DVTTDiwakar {जिस्ट-डीवीटीटी दिवाकर}
65.) GIST-DVTTJamuna {जिस्ट-डीवीटीटी जमुना}
66.) GIST-DVTTJanaki {जिस्ट-डीवीटीटी जानकी}
67.) GIST-DVTTKishor {जिस्ट-डीवीटीटी किशोर}
68.) GIST-DVTTKundan {जिस्ट-डीवीटीटी कुंदन}
69.) GIST-DVTTMadhu {जिस्ट-डीवीटीटी मधु}
70.) GIST-DVTTMalini {जिस्ट-डीवीटीटी मालिनी}
71.) GIST-DVTTManohar {जिस्ट-डीवीटीटी मनोहर}
72.) GIST-DVTTMayur {जिस्ट-डीवीटीटी मयूर}
73.) GIST-DVTTMegha {जिस्ट-डीवीटीटी मेघा}
74.) GIST-DVTTMohini {जिस्ट-डीवीटीटी मोहिनी}
75.) GIST-DVTTNayan {जिस्ट-डीवीटीटी नयन}
76.) GIST-DVTTNeha {जिस्ट-डीवीटीटी नेहा}
77.) GIST-DVTTNinad {जिस्ट-डीवीटीटी निनाद}
78.) GIST-DVTTPrakash {जिस्ट-डीवीटीटी प्रकाश}
79.) GIST-DVTTPreetam {जिस्ट-डीवीटीटी प्रीतम}
80.) GIST-DVTTRajashri {जिस्ट-डीवीटीटी राजश्री}
81.) GIST-DVTTRanjita {जिस्ट-डीवीटीटी रंजीता}
82.) GIST-DVTTSagar {जिस्ट-डीवीटीटी सागर}
83.) GIST-DVTTSamata {जिस्ट-डीवीटीटी समता}
84.) GIST-DVTTSamir {जिस्ट-डीवीटीटी समीर}
85.) GIST-DVTTShital {जिस्ट-डीवीटीटी शीतल}
86.) GIST-DVTTShweta {जिस्ट-डीवीटीटी श्वेता}
87.) GIST-DVTTSumeet {जिस्ट-डीवीटीटी सुमीत}
88.) GIST-DVTTSwapnil {जिस्ट-डीवीटीटी स्वपनिल}
89.) GIST-DVTTVasundhara {जिस्ट-डीवीटीटी वसुन्धरा}
90.) GIST-DVTTVijay {जिस्ट-डीवीटीटी विजय}
91.) Hinmith... {हिंमिथ...}
92.) HINmith018 {हिंमिथ०१८}
93.) HINmith033 {हिंमिथ०३३}
94.) HTChanakya {एचटी-चाणक्य}
95.) iitmhind {आईआईटीएमहिंदी}
96.) iitmsans {आईआईटीएमसंस्कृत}
97.) Jagran {जागरण}
98.) JC-BELA {जेसी-बेला}
99.) Kanika {कनिका}
100.) Kautilya {कौटिल्या}
101.) Krishna {कृष्णा}
102.) Kruti Dev 010 {कृतिदेव ०१०}
103.) Kruti Dev 010 Condensed {कृतिदेव ०१० कण्डेंस्ड}
104.) Kruti Dev 016 {कृतिदेव ०१६}
105.) Kruti Dev 020 {कृतिदेव ०२० }
106.) Kruti Dev 020 {कृतिदेव ०२०}
107.) Kruti Dev 180 {कृतिदेव १८०}
108.) Kruti Dev 501 {कृतिदेव ५०१}
109.) KrutiPad 010 {कृतिपैड ०१०}
110.) KrutiPad 030 {कृतिपैड ०३०}
111.) Kundli {कुण्डली}
112.) LangscapeDevPriya {लैंगस्केपदेवप्रिया}
113.) ManjushaMedium {मंजुषामीडियम}
114.) Marathi-Kanak {मराठी-कनक}
115.) Marathi-Kanchan {मराठी-कंचन}
116.) Marathi-Lekhani-Ital {मराठी-लेखनी-इटाल}
117.) Marathi-Lekhani {मराठी-लेखनी}
118.) Marathi-Roupya {मराठी-रॉउप्या}
119.) Marathi-Saras {मराठी-सरस}
120.) Marathi-Tirkas {मराठी-तिर्कस}
121.) Marathi-Vakra {मराठी-विक्रा}
122.) Marathi Sharada {मराठी शारदा}
123.) Marathi Tirkas {मराठी तिर्कस}
124.) MARmith0 {मराठीमिथ०}
125.) Maya {माया}
126.) MillenniumNilimaFX {मिलेनियम निलिमाएफएक्स}
127.) MillenniumVarun {मिलेनियम वरुण}
128.) MillenniumVarunFX {मिलेनियम वरुणएफएक्स}
129.) MillenniumVarunWeb {मिलेनियम वरुणवेब}
130.) Naidunia {नईदुनिया}
131.) Narad {नारद}
132.) NewDelhi {न्यूदेल्ही}
133.) Pankaj {पंकज}
134.) Patrika {पत्रिका}
135.) PIC {पीआर्इसी}
136.) Richa {रिचा}
137.) RK Sanskrit {आरके संस्कृत}
138.) Ruchi-Normal {रुचि-नॉर्मल}
139.) Sanskrit {संस्कृत}
140.) Sanskrit 1.2 {संस्कृत १.२}
141.) Sanskrit 98 {संस्कृत ९८}
142.) Sanskrit 99 {संस्कृत ९९}
143.) Sanskrit 99 ps {संस्कृत ९९ पीएस}
144.) Sanskrit New {संस्कृत न्यू}
145.) Sanskrit99classic {संस्कृत९९क्लासिक}
146.) Sanskritpc {संस्कृतपीसी}
147.) SansPost {संस्कृत पोस्ट}
148.) Saroj {सरोज}
149.) SD-TTSurekh {एसडी-टीटी सुरेख}
150.) Shiva {शिवा}
151.) Shivaji01 {शिवाजी ०१}
152.) Shivaji02 {शिवाजी ०२}
153.) Shivaji05 {शिवाजी ०५}
154.) ShivaMedium {शिवा मीडियम}
155.) Shree-Dev-001 {श्री-देव-००१}
156.) Shree-Dev-0708 {श्री-देव-०७०८}
157.) SHREE-DEV-0726-S00 {श्री-देव-०७२६-एस००}
158.) Shree-Pud-77NW {श्री-पुढ-77एनडब्ल्यू}
159.) SHREE-PUDHARI {श्री-पुढरी}
160.) SHREE708 {श्री७०८}
161.) Shusha {शुषा}
162.) Shusha02 {शुषा ०२}
163.) Shusha05 {शुषा ०५}
164.) st01web {एसटी०१वेब}
165.) SUBAK-1 {सुबक-१}
166.) SUBAK {सुबक}
167.) tbdsunil {टीबीडीसुनील}
168.) Vigyapti {विज्ञप्ति}
169.) W-C-905 {डब्ल्यू-सी-९०५}
170.) Walkman-Chanakya-901 {वॉकमैन-चाणक्य-९०१}
171.) Walkman-Chanakya-905 {वॉकमैन-चाणक्य-९०५}
172.) Walkman-Yogesh-Outline-1003 {वॉकमैन-योगेश-आउटलाइन-१००३}
173.) Webdunia {वेबदुनिया}
174.) Xdvng {एक्सदेवनागरी}
175.) XdvngMod {एक्सदेवनागरीमॉड}
176.) Yogeshweb {योगेशवेब}
177.) Yuvraj {युवराज}

श्री जगदीप सिंह दांगी जी को इस अनूठे प्रयास के लिए हार्दिक बधाई । उक्त लिंक द्वारा परीक्षण प्रति देखने के बाद पाठक अपनी प्रतिक्रियाएँ श्री जगदीप सिंह दांगी जी को भेज सकते हैं ।

Saturday, November 14, 2009

बाल दिवस की शुभकामनाएँ

सभी बच्चों को बाल दिवस की शुभकामनाएँ।

Tuesday, November 10, 2009

कविता

पतझर के दोहे

-आचार्य संजीव 'सलिल'

पतझर के रंग देखकर, आया मुझको याद.
आज ढला कल उगता, मत रो कर फरियाद..

देश-विदेश सभी जगह, पतझर दे सन्देश.
सुख-दुःख चुप रह झेल ले, हो उदास मत लेश..

सुधा-गरल दोनों 'सलिल'' प्रकृति के वरदान.
दे-ले जो वह सृष्टि में, पुजता ईश समान..

पतझर में पत्ते सभी, बदला करते रंग.
संसद को नेता करें, जैसे मिल बदरंग..

झर जाते देते नहीं, पत्ते रंग उधार.
रंग बदल बतला रहे, मुस्का गम में यार..

पतझर में होते नहीं, पत्ते तनिक उदास.
जल्दी ही उगें नए, करते 'सलिल' प्रयास.

झर-गिर फिर उठता मनुज, बढ़ता धर कर धीर.
पतझर से सीखे 'सलिल', चुप रह सहना पीर..

मीडिया विमर्श का अगला अंक प्रभाष जोशी स्मृति अंक

प्रभाष जोशी होने के मायने


भोपाल। हिंदी पत्रकारिता को पहचान देने वालों में श्री प्रभाष जोशी सबसे महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। वे पत्रकारिता में प्रयोगधर्मिता एवं सामाजिक सरोकारों की पत्रकारिता के लिए जीवनभर प्रयत्नशील रहे। उनके योगदान का मूल्यांकन करने का प्रयत्न मीडिया विमर्श, त्रैमासिक पत्रिका के स्मृति अंक में किया जाएगा। इस अंक के लिए आप अपने लेख, विश्लेषण, यादें, विशेष पत्र और फोटोग्राफ भेज सकते हैं। सामग्री भेजने की आखिरी तारीख 20 दिसंबर, 2009 है। सामग्री भेजने का पताः संपादकः मीडिया विमर्श (त्रैमासिक) 428, रोहित नगर, फेज-1, भोपाल- 462039 (मप्र)। सामग्री ई-मेल से भी भेज सकते हैं mediavimarsh@gmail.com। अधिक जानकारी के लिए फोन कर सकते हैं संजय द्विवेदी को उनका मोबाइल नंबर है- 09893598888

मीडिया विमर्श का अगला अंक प्रभाष जोशी स्मृति अंक

प्रभाष जोशी होने के मायने


भोपाल। हिंदी पत्रकारिता को पहचान देने वालों में श्री प्रभाष जोशी सबसे महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। वे पत्रकारिता में प्रयोगधर्मिता एवं सामाजिक सरोकारों की पत्रकारिता के लिए जीवनभर प्रयत्नशील रहे। उनके योगदान का मूल्यांकन करने का प्रयत्न मीडिया विमर्श, त्रैमासिक पत्रिका के स्मृति अंक में किया जाएगा। इस अंक के लिए आप अपने लेख, विश्लेषण, यादें, विशेष पत्र और फोटोग्राफ भेज सकते हैं। सामग्री भेजने की आखिरी तारीख 20 दिसंबर, 2009 है। सामग्री भेजने का पताः संपादकः मीडिया विमर्श (त्रैमासिक) 428, रोहित नगर, फेज-1, भोपाल- 462039 (मप्र)। सामग्री ई-मेल से भी भेज सकते हैं mediavimarsh@gmail.com। अधिक जानकारी के लिए फोन कर सकते हैं संजय द्विवेदी को उनका मोबाइल नंबर है- 09893598888

Saturday, November 7, 2009

आलेख

काले धन एवं नकली नोटों से छुटकारा - भ्रष्टाचार पूर्णत: खत्म

-कवि कुलवंत सिंह2 डी, बद्रीनाथ बिल्डिंगअणुशक्तिनगर, मुंबई - 94.


प्राय: सभी देशों की सरकारों का एक रोना साझा है. और वो भी अति भयंकर रोना! देश की अर्थ व्यवस्था में कला धन. यह काला धन बहुत से देशों को, बहुत सी सरकारों को बहुत रुलाता है. और बुद्धिजीवी वर्ग को अत्यंत चिंतित करता है. अर्थशास्त्रियों की नाक में दम करके रखता है. रोज नए नए सुझाव दिए जाते हैं, विचार किए जाते हैं कि किस तरह इस काले धन पर रोक लगाई जाए. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट तो छापों में विश्वास रखता है, जहाँ कहीं सुंघनी मिली नहीं कि पहुँच गए दस्ता लेकर. अजी! काले धन की बात तो छोड़िए! नोटों को लेकर इससे भी बड़ी समस्या का सामना कई देशों को करना पड़ता है, और वो है नकली नोटों की समस्या. दूसरे देश की अर्थव्यवस्था को चौपट करना हो याँ बेहाल करना हो, प्रिंटिंग प्रेस में दूसरे देश के नोट हूबहू छापिए और पार्सल कर दीजिए उस देश में. बस फ़िर क्या है - बिना पैसों के तमाशा देखिए उस देश का. अब तो उस देश की पुलिस भी परेशान. गुप्तचर संस्थाएं भी परेशान और सरकार भी परेशान! नकली नोट कहां कहाँ से ढ़ूंढ़े और किस जतन से? बड़ी मुश्किल में सरकार.बचपन से छ्लाँग लगाकर जब हमने भी होश सँभाला तो आए दिन काले धन की बातें पढ़कर, सुनकर, और नकली नोटों की बातें अखबारों में पढ़कर और टी.वी. में देख सुनकर, सरकारों की, अर्थशास्त्रियों की चिंता देख सुनकर हमें भी चिंता सताने लगी. लेकिन हमारे हाथ में तो कुछ है नही जो कुछ कर सकें. बस कुछ बुद्धिजीवियों के बीच बैठकर चाय-पानी या खाने के समय लोगों से चर्चा कर ली. अपनी बात कह दी और दूसरे की सुन ली और हो गई अपने कर्तव्य की इतिश्री. लेकिन नहीं यार! अपने में देश-भक्ति का कुछ बडा़ ही कीडा़ है. सो लग गए चिंता में. भले सरकार को हो या ना हो, देशभक्त को ज़रूर चिंता करनी चाहिए और वो भी जरूरत से ज़्यादा. भले अर्थशास्त्री बेफ़िकर हो गए हों! लेकिन नहीं, अपन को तो देश की चिंता है, काले धन की भी और नकली नोटों की भी. लेकिन किया तो किया क्या जाए. दिन रात इसी चिंता में रहते. चिंता में रहते रहते रात में स्वप्न भी इसी विषय पर आने लगे. कल तो हद ही हो गई. एक ऐसा स्वप्न आया कि क्या बताऊँ! पूरे विश्व से कालेधन और नकली नोटों की समस्या जैसे जड़ से ही खत्म हो गई और साथ में भ्रष्टाचार भी समाप्त. आप आश्चर्य करेंगे ऐसा कैसे? आइये विस्तार से बताता हूँ क्या स्वप्न देखा मैने -मैने देखा कि विश्व की सभी सरकारें इस विषय पर एकमत हो गईं हैं. और सबने मिलकर एक बड़ा महत्वपूर्ण निर्णय लिया है और निर्णय यह कि सभी सरकारें ’करेंसी’ को - सभी छोटे, बड़े नोटों को, सभी पैसों को पूरी तरह से अपने सभी देशवासियों / नागरिकों से वापिस लेकर पूरी तरह से नष्ट कर देंगी. और किसी प्रकार के कोई नोट यां करेंसी छापने की भी बिलकुल जरूरत ही नही है. जिसने जितनी भी रकम सरकार को सौंपी है उसके बदले - एक ऐसा सरकारी मनी कार्ड उनको दिया जायेगा जिसमें उनकी रकम अंकित कर दी जायेगी. सभी नागरिकों को इस मनी कार्ड के साथ साथ एक ऐसा ’डिस्प्ले’ भी दिया जायेगा जिसमें कोई भी जब चाहे अपनी उपलब्ध रकम (धनराशि) देख सकता है एवं अपनी रकम का जितना हिस्सा जिसको चाहे ट्रांसफर कर सकता है. भविष्य में सभी नागरिकों का भले वह व्यवसायी हो, नौकर हो, कर्मचारी हो, अधिकारी हो, मजदूर हो, सर्विस करता हो, बिल्डर हो, कांट्रैक्टर हो, कारीगर हो, सब्जी बेचने वाल हो, माली हो, धोबी हो, दुकानदार हो, यां जो कुछ भी करता हो, यां भले ही बेरोजगार हो, सभी प्रकार का लेन देन उस एक कार्ड के द्वारा ही होगा. पैसों का, नोटों का लेन देन बिलकुल बंद! नोट बाजार में हैं ही नहीं! बस सबके पास एक सरकारी मनी कार्ड!!भारत सरकार जो अमूनान चुप्पी साध लेती है यां जो कई काम भगवान के भरोसे छोड़ देती है यां जो सबसे बाद में किसी भी चीज को, नियम को यां कानून को कार्यान्वित करती है. लेकिन, इस मामले में तो भारत सरकार ने इतनी मुस्तैदी दिखाई कि पूछिये मत! पता नही कि काले धन से सरकार खूब ज्यादा ही परेशान थी, यां नकली नोटों के भयंकर दैत्याकार खौफ से यां फिर उन राज्नीतिज्ञों से जिन्होंने स्विस बैंकों में अरबों करोड़ रुपये काले धन के रूप में जमा कर रखे हैं. खैर बात जो भी हो, भारत सरकार ने तुरंत आनन फानन में कैबिनेट की मीटिंग की! निर्णय लिया. और संसद में पेश कर दिया! और पास भी करा लिया. कानून बना दिया. निलेकर्णी को बुलाया और निर्देश किया कि जो पहचान पत्र आप देश के सभी नागरिकों को बनाकर देने वाले हो - जिसमें व्यक्तिगत पहचान होगी, घर का, आफिस का पता होगा, फोटो होगी, बर्थ डेट, ब्लडग्रुप एवं अन्य सभी जरूरी जानकारी होगी उसी में यह सरकारी मनी कार्ड भी हो. अब यह नागरिकों के लिये सरकारी पहचान पत्र ही नही बल्कि ’सरकारी पहचान पत्र कम मनी कार्ड’ होना चाहिये. सभी की धनराशि सिर्फ अंकों में (यां रुपयों में) दिखाई जायेगी और देश भर में सभी ट्रांजैक्शन और लेन देन - चाहे वह एक रुपये का हो यां करोड़ों का! प्रत्येक नागरिक द्वारा इसी के द्वारा किया जायेगा. हर एक नागरिक को इस कार्ड के साथ साथ एक डिस्प्ले भी दिया जायेगा. जिसमें वह जब चाहे अपनी जमा धन राशि देख सकता है और इसके द्वारा जमा धनराशि में से जिसके नाम पर, जब चाहे, जितनी भी चाहे धनराशि ट्रांसफर कर सकता है. निलेकर्णी जी तो अपनी टीम के साथ पहले ही तैयार बैठे थे. यह एजेंडा भी उसमें जोड़ दिया गया. अगले तीन वर्षों में यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से तैयार हो गया. सरकार ने नोटिस निकाल दिये. सभी अखबारों में, टी वी चैनलों में, हर जगह. लोग अपनी सारी धनराशि/ कैश अपने बैंक अकाउंट में जमा कर दें - भले ही देश भर में आपके कितने ही अकाउंट हों सभी की धनराशि जोड़कर उस सरकारी क्रेडिट कार्ड में इंगित कर दी जायेगी. तीन महीनों के अंदर देश भर में यह व्यवस्था लागू हो गई. सभी को ’सरकारी पहचान पत्र कम मनी कार्ड’ दे दिये गये.सुबह धोबी मेरे पास आया और मैने क्रेडिट कार्ड से डिस्प्ले में डालकर दस रुपये उसके नाम पर ट्रांसफर कर दिये. थोड़ी देर में दूधवाला आया मैने अपने कार्ड से उसके कार्ड में 24 रुपये ट्रांसफर कर दिये. मेरी पत्नी हाउसवाइफ (ग्रहणी) है. उसने कहा मार्केट जाना है कुछ पैसे दो! मैने अपने कार्ड से उसके कार्ड में 2 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिये. मार्केट जाकर उसने सब्जी खरीदी और सब्जी वाले के कार्ड में 240 रुपये ट्रांसफर कर दिये. कुछ मिठाइयां हलवाई के यहां से खरीदीं और 430 रुपये उस दुकान वाले के कार्ड में ट्रांसफर कर दिये. मार्केट में उसने कुछ कपड़े बच्चों के लिये खरीदे और 615 रुपये उसने दुकान के कार्ड में ट्रांसफर कर दिये. ’किराने’ की दुकान से उसने कुछ राशन खरीदा और 315 रुपये उसने उस राशन वाली दुकान के कार्ड में ट्रांसफर कर दिये. कहीं कोई कैश / नकदी का लेन देन नही हुआ. जरूरत ही नही पड़ी. कैश में लेने देन हो ही नही सकता था, अब किसी के हाथ में कोई कैश, रुपया, नोट यां पैसा हो, तब ना! सब तो सरकार ने लेकर नष्ट कर दिये. करेंसी की प्रिंटिंग बिलकुल बंद जो कर दी. मेरा दस वर्ष का बेटा मेरे पास आया और कुछ पैसे मांगे मैने अपने कार्ड से 100 रुपये उसके कार्ड में ट्रांसफर कर दिये.महीने के अंत में मेरी गाड़ी धोने वाला आया, बर्तन मांजने वाली बाई आयी, घर का काम करने वाली बाई आयी. सबके कार्ड में मैने अपने कार्ड से जरूरत के हिसाब से धनराशि ट्रांसफर कर दी. महीने की शुरुआत होते ही मेरे कार्ड में अपने बैंक में दिये निर्देश के अनुसार मेरी तनख्वाह (सेलरी) में से आवश्यक धनराशि मेरे कार्ड में ट्रांसफर हो गई. बैंक में जाकर पैसे निकलवाने की जरुरत ही नही पड़ी. सारे कार्य यह पहचान पत्र कम मनी कार्ड कर रहा है. और आप चाहें तो भी कैश आप निकलवा ही नही सकते, धनराशि को सिर्फ ट्रांसफर करवा सकते हैं क्योंकि बैंक वालों के पास भी रुपये, नोट हैं ही नहीं. उनके पास भी केवल अंकों में रुपये हैं. आप जितने चाहें फिक्स्ड डिपोजिट करवायें जितने चाहें कार्ड में ट्रांसफर करवायें. हर व्यक्ति को एक ही कार्ड. कार्ड यां डिस्प्ले में कोई तकनीकी खराबी आई तो बस एक फोन किया और आपको दूसरा कार्ड यां डिस्प्ले मुफ्त में दे दिया जायेया.मुझे घर खरीदना था. बिल्डर से देख कर घर पसंद किया 20 लाख का था. मेरे पास बैंक में जमा धनराशि 5 लाख थी 15 लाख बैंक से लोन लेना है. सारे काम बस उसी पुराने तरी के से हुये, पेपर वगैरह तैयार हुये और बैंक से लोन मिल गया. बिल्डर के कार्ड में 15 लाख बैंक से और मेरे कार्ड/अकांउट से 5 लाख ट्रांसफर हो गये. स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और अन्य ट्रांसफर चार्जेस सभी कुछ कार्ड से कार्ड के द्वारा ट्रांसफर हुआ. कहीं कोई बलैक मनी न उपजी, न बिखरी, न फैली. अरे यह क्या मुझे तो कोई अंडर टेबल, यां चाय पानी के लिये भी कहीं कुछ पैसा देना नही पड़ा. न ही किसी ने कुछ मांगा. अरे कोई मांगे तो भला कैसे? कैश तो है नही किसी के पास. कार्ड में ट्रांसफर करवायेगा तो मरेगा. संभव ही नही है. क्या बात है! लगता है भ्रष्टाचार भी खत्म होने को है.प्राइवेट एवं सरकारी कंपनियों एवं उद्यमों को भी इसी प्रकार कार्ड जारी किये गये. जो काम जैसा चल रहा था, वैसा ही चलने दिया गया. बस सभी ट्रांसैक्शन (पैसे का लेन देन) एक कार्ड से दूसरे कार्ड पर होने लगा. शाम को आफिस से बाहर आया तो देखा कांट्रैक्टर मजदूरों को उनकी दिहाड़ी का पैसा उनके कार्ड में ट्रांसफर कर रहा था और बिना कम किये यां गलती के. अरे एक गलती भी भारी पड़ सकती है.मुझे विदेश जाना था, पासपोर्ट वीजा से लेकर धन परिवर्तन (मनी एक्स्चेंज) सभी कुछ कार्ड में धनराशि के ट्रांसफर द्वारा ही किया गया. विदेश जाने पर वहां की जितनी करेंसी मुझे चाहिये थी अपने कार्ड पर ही मुझे परिवर्तित कर दी गई. वहां पर भी हर जगह बस कार्ड पर ही ट्रांसफर हो रहा था. कहीं कोई परेशानी नही हुई.किसानों को उनके उत्पाद की पूरी धनराशि बिना किसी कटौती के मिलनी शुरू हो गई. किसान भाई बहुत खुश हुये. सरकारी आफिसों से भी लोग बहुत खुश हो गये, कहीं कोई अपना हिस्सा ही नही मांग रहा. मांगे तो कार्ड में ट्रांसफर करवाना पड़े और करवाये तो तुरंत रिकार्ड में आ जाये, पकड़ा जाये. संभव ही नही है.सारे काले धन की समस्या! सारे नकली नोटों की समस्या, सब की सब एक झटके में तो ख्त्म हुई हीं. भ्रष्टाचार का भी नामों निशान न रहा. मैने चैन की सांस ली. चलो इस देश-भक्त की चिंता तो खत्म हुई. रुपयों से संबंधित सारी समस्याएं किस तरह एक झटके में हमेशा के लिये समाप्त हो गयीं. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की सरदर्दी तो बिलकुल ही खत्म हो गई. सारे ट्रांसैक्शन वह बहुत ही आसानी से ट्रेस कर पा रहे थे. यहां तक कि उनके अपने लोग गऊ बन गये थे. पुलिस की हजारों हजार दिक्कतें एक झटके में सुलझ गई थीं. हर केस को अब वह आसानी से सुलझा पा रहे थे. हर ट्रांसैक्शन अब उनकी नजर में था. अपराधियों को पकड़ना बहुत ही सरल हो गया था. अपराध अपने आप कम से कम होते गये और न के बराबर रह गये. पुलिस के अपने लोग किसी प्रकार की गलत ट्रांसैक्शन कर ही नही सकते थे, कर ही नही पा रहे थे. सबके सब दूध के धुले हो गये. यां कहिये होना पड़ा. आदमी खुद साफ हो तो उसे लगता है सारी दुनिया साफ होनी चाहिये. जब वह खुद कुछ गलत नही कर सकते थे, तो साफ हो गये, जब खुद साफ हो गये तो समाज को साफ करने लग गये. बहुत जल्द परिणाम सामने थे. ट्रैफिक पुलिस वाले अब अपनी जेबें गरम करने के बजाय सिर्फ कानून यां सरकार की जेब ही गरम कर सकते थे. देश में भ्रष्टाचार पूरी तरह से बंद हो चुका था. न्याय व्यवस्था जोकि पूरी तरह से चरमरा गई थी! पुनर्जीवित हो उठी. सभी अधिकारी, पुलिस, नेता, जज, सरकारी कर्मचारी, सबके अकांउट्स क्रिस्टल क्लियर हो गये. रह गई तो बस केवल सुशासन व्यवस्था. यह तो सच ही अपने आप में राम राज्य हो गया. गांधी का सपना सच हो गया.मैं बहुत खुश हुआ. हंसते हंसते नींद खुली! अखबार में नोटिस ढ़ूंढ़ने लगा. कहीं नहीं मिला. फिर याद आया कि अरे यह तो तीन साल बाद होने वाला है. तो आइये, हम सभी मिल कर तीन साल बाद भारत सरकार द्वारा आने वाले इस नोटिस का इंतजार करें.

Saturday, October 24, 2009

दोहों की दुनिया



- संजीव 'सलिल'



देह नेह का गेह हो, तब हो आत्मानंद.
स्व अर्पित कर सर्व-हित, पा ले परमानंद..

मन से मन जोड़ा नहीं, तन से तन को जोड़.
बना लिया रिश्ता 'सलिल', पल में बैठे तोड़..

अनुबंधों को कह रहा, नाहक जग सम्बन्ध.
नेह-प्रेम की यदि नहीं, इनमें व्यापी गंध..

निज-हित हेतु दिखा रहे, जो जन झूठा प्यार.
हित न साधा तो कर रहे, वे पल में तकरार..

अपनापन सपना हुआ, नपना मतलब-स्वार्थ.
जपना माला प्यार की, जप ना- कर परमार्थ..

भला-बुरा कब कहाँ क्या, कौन सका पहचान?
जब जैसा जो घट रहा, वह हरि-इच्छा जान.

बहता पानी निर्मला, ठहरा तो हो गंद.
चेतन चेत न क्यों रहा?, 'सलिल' हुआ मति-मंद..

***

Monday, October 19, 2009

हिंदी अंत्याक्षरी प्रतियोगिता संपन्न




दीवाली के अवसर पर हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन, आंचलिक कार्यालय, चेन्नई में हिंदी अंत्याक्षरी प्रतियोगिता संपन्न हुई । डॉ. विजया, हिंदी अधिकारी, भारतीय स्टेट बैंक, चेन्नई ने अंत्याक्षरी का आयोजन किया । इस प्रतियोगिता में सात टीम शामिल थे । विजेता टीमों को महाप्रबंधक, दक्षिणांचल श्री आर.राधाकृष्णन तथा श्री के.राधाकृष्णन, उप महाप्रबंधक, एलपीजी ने पुरस्कार प्रदान किए । आयोजन किया । कार्यक्रम का संयोजन डॉ. बशीर, उप प्रबंधक (राजभाषा) ने किया । दीपोत्सव के अवसर पर आयोजित इस प्रतियोगिता का कार्यालय में हिंदी की महक और चमक फैलाने में का विशिष्ट योगदान रहा ।

संजीव 'सलिल' की तेवरियाँ


१.

ताज़ा-ताज़ा दिल के घाव.
सस्ता हुआ नमक का भाव..
मंझधारों-भँवरों को पार,
किया, किनारे डूबी नाव..
सौ चूहे खाने के बाद.
हुआ अहिंसा का है चाव..
ताक़तवर के चूम कदम.
निर्बल को दिखलाया ताव..
ठण्ड भगाई नेता ने,
जला झोपडी, बना अलाव..
डाकू तस्कर चोर खड़े
मतदाता क्या करे चुनाव..
अफसर रावण जन सीता.
कैसे होगा 'सलिल' निभाव..

***

२.

दिल ने हरदम चाहे फूल.
पर दिमाग ने बोए शूल..
मेहनतकश को कहें गलत.
अफसर काम न करते भूल..
सत्य दोगली है दुनिया.
नहीं सुहाते इसे उसूल..
पैर पटक मत नाहक तू.
सर जा बैठे उड़कर धूल..
बने तीन के तेरह भी.
डूबा रहे अपना धन मूल..
मंझधारों में विमल 'सलिल'.
गंदा करते हम जा कूल..
धरती पर रख पैर जमा.
'सलिल' न दिवा स्वप्न में झूल..
***

३.

खर्चे अधिक आय है कम.
दिल रोता, आँखें हैं नम..
पला शौक तमाखू का.
बना मौत का फंदा, यम..
जो करता जग उजियारा.
उसी दीप के नीचे तम..
सीमाओं की फिक्र नहीं.
ठोंक रहे संसद में ख़म..
जब पाया तो खुश न हुए.
खोया तो करते क्यों गम?
तन-तन रुचे न मन्दिर की.
कोठे की रुचती छम-छम..
वीर भोग्या वसुंधरा.
'सलिल' रखो हाथों में दम..
***

Friday, October 16, 2009

दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ



दीप ज्योति बनकर हम


-आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'


दीप ज्योति बनकर हम
जग में नव प्रकाश फैलाएं.
आत्म और परमात्म मिलाकर
दीप-ज्योति बन जाएँ...

दस दिश प्रसरित हो प्रकाश
तम् तनिक न हो अवरोध.
सबको उन्नति का अवसर हो
स्वाभिमान का बोध.
पढने, बढ़ने, जीवन गढ़ने
का सबको अधिकार.
जितना पायें, शत गुण बाँटें
बढे परस्पर प्यार.
रवि सम तम् पी, बाँट उजाला
जग ज्योतित कर जाएँ.
अंतर्मन का दीप बालकर
दीपावली मनाएँ...

अंधकार की कारा काटें,
उजियारा हो मुक्त.
निज हित गौड़, साध्य सबका हित,
जन-गण हो संयुक्त.
श्रम-सीकर की विमल नर्मदा,
'सलिल' करे अवगाहन.
रचें शून्य से स्रष्टि समूची,
हर नर हो नारायण.
आत्म मिटा विश्वात्म बनें,
परमात्म प्राप्त कर पायें.
'मैं' को 'हम' में कर विलीन,
'सब' दीपावली मनाएँ...

एक दीप गर जले अकेला,
तूफां उसे बुझाता.
शत दीपो से जग रोशन हो,
अंधकार डर जाता.
शक्ति एकता में होती है,
जो चाहे वह कर दे.
माटी के नन्हें दीपक को
तम् हरने का वर दे.
बने अमावस भी पूनम,
यदि दीप साथ जल जाएँ.
स्नेह-साधना करें अनवरत
दीपावली मनाएँ...



दीवाली गीत

हिल-मिल
दीपावली मना रे...
*
चक्र समय का
सतत चल रहा,
स्वप्न नयन में
नित्य पल रहा.
सूरज-चंदा
उगा-ढल रहा.
तम प्रकाश के
तले पल रहा,
किन्तु निराश
न होना किंचित
नित नव
आशा-दीप जला रे.
हिल-मिल
दीपावली मना रे...

*

तन-दीपक
मन बाती प्यारे!
प्यास तेल को
मत छलका रे.
श्वासा की
चिंगारी लेकर,
आशा जीवन-
ज्योति जला रे.
मत उजास का
क्रय-विक्रय कर-
मुक्त हस्त से
'सलिल' लुटा रे.
हिल-मिल
दीपावली मना रे...

दोहों की दीपावली

दोहों की दीपावली, रमा भाव-रस खान.
श्री गणेश के बिम्ब को, 'सलिल' सार अनुमान..

दीप सदृश जलते रहें, करें तिमिर का पान.
सुख समृद्धि यश पा बनें, आप चन्द्र-दिनमान..

अँधियारे का पान कर करे उजाला दान.
मती का दीपक 'सलिल', सर्वाधिक गुणवान..

मन का दीपक लो जला तन की बाती डाल.
इच्छाओं का घृत जले, मन नाचे दे ताल..

दीप अलग सबके मगर, उजियारा है एक.
राह अलग हर पन्थ की, ईश्वर सबका एक..

बुझ जाती बाती 'सलिल', मिट जाता है दीप.
किन्तु यही सूर्य का वंशधर, प्रभु के रहे समीप..

दीप अलग सबके मगर, उजियारा है एक.
राह अलग हर पन्थ की, लेकिन एक विवेक..

दीपक बाती ज्योति को, सदा संग रख नाथ!
रहें हाथ जिस पथिक के, होगा वही सनाथ..

मृण्मय दीपक ने दिया, सारा जग उजियार.
तभी रहा जब परस्पर, आपस में सहकार..

राजमहल को रौशनी, दे कुटिया का दीप.
जैसे मोती भेंट दे, खुद मिट नन्हीं सीप..

दीप ब्रम्ह है, दीप हरी, दीप काल सच मान.
सत-शिव-सुन्दर है यही, सत-चित-आनंद गान..

मिले दीप से दीप तो, बने रात भी प्रात.
मिला हाथ से हाथ लो, दो शह भूलो मात..

ढली सांझ तो निशा को, दीप हुआ उपहार.
अँधियारे के द्वार पर, जगमग बन्दनवार..

रहा रमा में मन रमा, किसको याद गणेश.
बलिहारी है समय की, दिया जलाये दिनेश..

लीप-पोतकर कर लिया, जगमग सब घर-द्वार.
तनिक न सोचा मिट सके, मन की कभी दरार..

सरहद पर रौशन किये, शत चराग दे जान.
लक्ष्मी नहीं शहीद का, कर दीपक गुणगान..

दीवाली का दीप हर, जगमग करे प्रकाश.
दे संतोष समृद्धि सुख, अब मन का आकाश..

कुटिया में पाया जनम, राजमहल में मौत.
आशा-श्वासा बहन हैं, या आपस में सौत?.

पर उन्नति लख जल मरी, आप ईर्ष्या-डाह.
पर उन्नति हित जल मरी, बाती पाई वाह..

तूफानों से लड़-जला, अमर हो गया दीप.
तूफानों में पल जिया, मोती पाले सीप..

तन माटी का दीप है, बाती चलती श्वास.
आत्मा उर्मिल वर्तिका, घृत अंतर की आस..

जीते की जय बोलना, दुनिया का दस्तूर.
जलते दीपक को नमन, बुझते से जग दूर..

मातु-पिता दोनों गए, भू को तज सुरधाम.
स्मृति-दीपक बालकर, करता 'सलिल' प्रणाम..

जननि-जनक की याद है, जीवन का पाथेय.
दीप-ज्योति में बस हुए, जीवन-ज्योति विधेय..

नन्हें दीपक की लगन, तूफां को दे मात.
तिमिर रात का मिटाकर, 'सलिल' उगा दे प्रात..

दीप-ज्योति तन-मन 'सलिल', आत्मा दिव्य प्रकाश.
तेल कामना को जला, तू छू ले आकाश..

***********************

आँखें गड़ाये ताकता हूँ आसमान को.
भगवान का आशीष लगे अब झरा-झरा..

माता-पिता गए तो लगा प्राण ही गए.
बेबस है 'सलिल' आज सभी से डरा-डरा..

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Wednesday, October 14, 2009

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, कोयंबत्तूर में हिंदी पखवाड़ा संपन्न














सरल हिंदी प्रयोग करते हुए हम राजभाषा के प्रयोग को बढ़ावा दे सकते हैं : बी.एस.वी. शर्मा

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, क्षेत्रीय कार्यालय, कोयंबत्तूर में दि. 1 सितंबर, 2009 से दि. 15 सितंबर, 2009 तक हिंदी पखवाड़ा उत्सव का आयोजन किया गया । सरकारी कामकाज में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करने हेतु क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्री बी.एस.वी. शर्मा जी द्वारा क्षेत्र के सभी अधिकारियों तथा कर्मचारियों से अपील की गई । हिंदी पखवाड़ा के उपलक्ष्य में हिंदी प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने तथा विभिन्न आयामों में स्टॉफ सदस्यों की कुशलता विकसित करने हेतु 18 विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें कार्यालय के अधिकांश अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने भाग लिया । पखवाड़ा के दौरान ही केंद्रीय आयुक्त महोदय द्वारा कोयंबत्तूर क्षेत्रीय कार्यालय का दौरा किया गया था, तदवसर पर संपन्न उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अधिकांश कार्रवाई हिंदी में ही की गई थी । इसी दौरान एक विशेष हिंदी कार्यशाला का आयोजन भी किया गया जिसमें प्रतिभागियों को कंप्यूटर पर हिंदी में यूनिकोड फांटों के उपयोग के साथ कार्य करने का प्रशिक्षण दिया गया । प्रशिक्षित कर्मचारियों से कंप्यूटर पर अधिकाधिक कार्य हिंदी में करने की अपील भी की गई है । ध्यातव्य है कि कोयंबत्तूर क्षेत्र में हिंदी कार्यान्वयन में विशेष प्रगति दर्ज की गई है । कंप्यूटर पर हिंदी कार्य की मात्रा सुनिश्चित करने हेतु कई मानक मसौदें द्विभाषी रूप में बनाए गए हैं । इसके अलावा मानक मसौदों की सी.डी. (A Compact Disc of Bilingual Standard Drafts) भी बनाई गई है, जिसका वितरण कई कार्यालयों में किया गया है । चेक अग्रेषण पत्र तथा वेतन-पर्ची का द्विभाषी रूप में प्रयोग हो रहा है । नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, कोयंबत्तूर का संयोजन भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा सफलतापूर्वक किया
जा रहा है । समिति को सक्रिय बनाने तथा उसकी गतिविधियों में तेजी लाने में समिति के अध्यक्ष श्री बी.एस.वी. शर्मा, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त तथा सदस्य-सचिव डॉ. सी. जय शंकर बाबु, सहायक निदेशक (रा.भा.) द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं । कंप्यूटर में राजभाषा प्रयोग को बढ़ावा देने तथा राजभाषा के विविध आयामों में विकास सुनिश्चित करने के लिए डॉ. सी. जय शंकर बाबु द्वारा बनाया गया राजभाषा साधन सी.डी. (A CD of Official Language Resources) के प्रयोग के साथ नराकास के सदस्य कार्यालयों में राजभाषा कार्यान्वयन में तेजी भी नज़र आई है । स्टॉफ-सदस्यों को बोलचाल की हिंदी सिखाने हेतु भी कार्यालय में कक्षाओं की व्यवस्था की गई है, जिसमें अधिकारी एवं कर्मचारी दिलचस्पी के साथ शामिल हो रहे हैं ।
पुरस्कार वितरण समारोह

हिंदी पखवाड़ा के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत करने हेतु पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन दि. 14.10.2009 को अपराह्न 3 बजे आयोजित किया गया । कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती भुवनेश्वरी के प्रार्थनागीत के साथ हुआ । सुश्री सी. अमुदा, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-II ने स्वागत भाषण दिया । तदवसर पर उन्होंने कहा कि बहुभाषी भारत में संपर्क भाषा के रूप में हिंदी की विशिष्ट भूमिका है । राष्ट्रीय एकता और अखंडता के साधन महत्वपूर्ण हिंदी भाषा का प्रयोग राजभाषा के रूप अवश्य किया जाना चाहिए । तदनंतर डॉ. सी. जय शंकर बाबु, सहायक निदेशक (राजभाषा) ने राजभाषा कार्यान्वयन की प्रगति का जायजा दिया ।
समारोह की अध्यक्षता श्री बी.एस.वी. शर्मा, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने की । उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि हिंदी हमारी राजभाषा है । सरल हिंदी प्रयोग करते हुए हम राजभाषा के प्रयोग को बढ़ावा दे सकते हैं । सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग करने हमारा संवैधानिक दायित्व है । इस दायित्व की पूर्ति हमारी निष्ठा पर निर्भर करती है । हम सरकारी कार्यों से संबंधित लक्ष्यों को जिस तरह हासिल कर रहे हैं, उसी तरह हिंदी प्रयोग संबंधी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भी आवश्यक प्रयास किया जाए । उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी कामकाज में आज कंप्यूटर का ज्यादा प्रयोग हो रहा है, इसी दृष्टि से कंप्यूटर पर हिंदी प्रयोग का प्रशिक्षण भी अधिकांश कर्मचारियों को दिया गया है ।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित श्रीमती डॉ. वी. पद्मावती सहायक प्रोफ़ेसर, हिंदुस्तान महाविद्यालय ने अपने वक्तव्य में हिंदी के महत्व को रेखांकित करते हुए किया और कुछ जीवंत उदाहरण देते हुए हिंदी सीखने एवं उसका प्रयोग करने का अनुरोध करते हुए बहुभाषाई परिवेश में राजभाषा के रूप में हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला । अन्य भाषाओं की तरह हिंदी का सम्मान करना और सरकारी कामकाज उसका प्रयोग करना भी हमारा कर्त्तव्य है ।

प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मुख्य अतिथि तथा क्षेत्रीय आयुक्त महोदय के करकमलों से पुरस्कार वितरण किए गए । कार्यालय के स्टॉफ सदस्यों तथा उनके बच्चों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी इस अवसर पर आयोजित किए गए । हिंदी सीखने की जरूरत पर जोर देने वाला हास्यमय नाटक एवं नन्हें बच्चों के नाच-गान, विभिन्न वेष-भूषाओं की प्रस्तुति विशेष आकर्षण रहे हैं । समारोह के अंत में डॉ. सी. जय शंकर बाबु, सहायक निदेशक (राजभाषा) ने धन्यवाद ज्ञापन किया । राष्ट्रगान के साथ समारोह सुसंपन्न हुआ ।
हिंदी पखवाड़ा के दौरान ही नहीं नियमित रूप से कार्यालय में अधिकाधिक कार्य हिंदी में करने हेतु स्टॉफ को प्रोत्साहित किया गया । कर्मचारियों में राजभाषा हिंदी के प्रति चेतना जगाने में हिंदी पखवाड़ा उत्सव का आयोजन सफल रहा ।

एचपीसीएल, गुंतकल डिपो में हिंदी कंप्यूटर कार्यशाला सुसंपन्न



हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड, गुंतकल डिपो में दि.12.10.2009 को हिंदी कंप्यूटर प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन प्रभारी अधिकारी श्री रामप्रताप जी ने किया । डॉ. एस. बशीर, उप प्रबंधक (राजभाषा) ने कार्यशाला के उद्देश्य से अवगत कराते हुए कहा कि राजभाषा हिंदी का प्रचार-प्रसार हमारा कर्तव्य है । कंप्यूटर के प्रयोग से हिंदी में पत्रचार बढ़ाया जा सकता है । उन्होंने सभी प्रतिभागियों से अनुरोध किया कि कंप्यूटर प्रशिक्षण के बाद हिंदी का प्रयोग करते हुए हिंदी से संबंधित सभी निर्धारित लक्ष्य हासिल करने का प्रयास करें । प्रशिक्षण कार्यक्रम का संयोजन डॉ. बशीर जी ने किया और इसमें डिपो के अधिकारी श्री रामाराव जी ने सहयोग दिया । व्याख्याता के रूप में डॉ. सी. जय शंकर बाबु को आमंत्रित किया था, जिन्होंने कंप्यूटर पर हिंदी तथा अन्य भाषाओं के लिए उपलब्ध संसाधन, यूनिकोड प्रयोग, मैक्रोसॉफ्ट ऑफीस में हिंदी में शब्द-संसाधन आदि के संबंध में पवरपाइंट प्रस्तुति के साथ व्याख्यान दिया । इस कार्यशाला में दस अधिकारी उपस्थित थे । इन्हें हिंदी में टंकण, ई-मेल भेजने आदि के संबंध में व्यावहारिक सुझाव दिए गए । अंत में डॉ. बशीर जी ने धन्यवाद ज्ञापन किया । इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से प्रतिभागियों को अपेक्षित प्रेरणा अवश्य मिली है, जिसका सुपरिणाम इनके द्वारा कंप्यूटर पर हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में कार्य करने का प्रयास किए जाने के रूप में फलीभूत होगा ।

Friday, October 9, 2009

पुदुच्चेरी में क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन एवं राजभाषा पुरस्कार वितरण संपन्न


राष्ट्रीय स्वाभिमान और सुविधा की दृष्टि से हिंदी ही उपयुक्त संपर्क भाषा होगी – अजय माकन


जवाहरलाल नेहरु स्नातकोत्तर चिकित्सकीय शिक्षा एवं शोध संस्थान (जिपमेर), पुदुच्चेरी के प्रेक्षागृह में क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन का उद्घाटन आज सुबह 10 बजे माननीय केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्री अजय माकन जी ने द्वीप प्रज्वलन के साथ किया ।
भारत एक विशाल देश है, जहाँ कई भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती है किंतु भारत की सभी भाषाओं की आत्मा एक ही है, जो भारतीयता का समान संदेश देती रही हैं । हमारी सामासिक संस्कृति का केंद्र बिंदु एक ही रहा है, भले ही इसकी अभिव्यक्ति का माध्यम विभिन्न भाषाएँ रही हों । हमारे महान देश में भाषाओं की विभिन्नता इसकी मूलभूत एकता में कभी बाधक नहीं रही है । इनके भीतर भारतीयता सतत रूप से प्रवाहित रही है । इस एकता में भारतीय भाषाओं में रचित साहित्य का बड़ा योगदान रहा है । यदि हम भारती की विभिन्न भाषाओं में रचित साहित्य पर दृष्टि डालें, तो यह तथ्य सहज ही स्पष्ट हो जाएगा कि कश्मीर से कन्याकुमारी और सौराष्ट्र से कामरूप तक सभी लेखकों और कवियों ने अपनी रचनाओं में समसामयिक विचारधारा से प्रभावित होकर अपनी-अपनी भाषाओं में अपने विचारों की अभिव्यक्ति की है ।
हमें संघ की राजभाषा हिंदी के साथ-साथ सभी अन्य भाषाओं-बोलियों का संरक्षण भी करना है ताकि विकास, रोजगार और पनर्वास की प्रक्रिया के कारण ये विलुप्त न हो जाए । भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं होती है । अपितु इससे बोलने वालों की संस्कृति और संस्कार भी जुड़े होते हैं ।
हमारे देश के संविधान ने हम सबके ऊपर भारतीय भाषाओं के विकास का दायित्व सौंपा है । इस जिम्मेदारी का निर्वाह हमें धैर्य, लगन और विवेकपूर्ण ढंग से करना है । कोई भी भाषा तभी समृद्ध हो सकती है और जनता द्वारा उसका तभी स्वागत होता है जब वह अपने आपको पुराने मापदंडों से बांध कर न रखे । हिंदी के स्वरूप में भी भारतीय समाज और संस्कृति की विविधता और एकता, विज्ञान और प्रौद्योगिकी की पारिभाषिक स्पष्टता, दर्शन और धर्म की व्यापकता प्रतिबिंबित होनी चाहिए । संपर्क भाषा के रूप में हिंदी का व्यापक प्रयोग सदैव से ही होता रहा है । यहां तक कि अंग्रेजों को भी अपना शासन चलाने के लिए टूटी-फूटी ही सही पर हिंदी ही हितकर लगी और आज बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने उत्पादकों को बेचने के लिए हिंदी व अन्य भाषाओं का प्रयोग कर रही हैं । अप भारत के किसी भी प्रांत में चले जाएं, वहाँ आपकों हिंदी का प्रयोग अवश्य मिलेगा । हिंदी का व्यापक जनाधार और यह धीरे-धीरे परंतु निश्चित रूप से बढ़ता ही जा रहा है ।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वराज, स्वदेशी और स्वभाषा पर जोर दिया गया था । उस समय यह समझा गया था कि बिना स्वदेशी व स्वभाषा के स्वराज सार्थक नहीं होगा । हमारे राष्ट्रीय नेताओं की यह दृढ़ धारणा थी कि कोई भी देश अपनी स्वतंत्रता को अपनी भाषा के अभाव में मौलिक रूप से परिभाषित नहीं कर सकता, उसे अनुभव नहीं कर सकते । उन महापुरुषों की मान्यता थी कि यदि हमें भारत में एक राष्ट्र की भावना सुदृढ़ करनी है तो एक संपर्क भाषा होना नितांत आवश्यक है और राष्ट्रीय स्वाभिमान और सुविधा की दृष्टि से हिंदी ही उपयुक्त संपर्क भाषा होगी । उन महापुरुषों में नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी का नाम विशेष रूप से स्मरणीय है । उन्होंने कहा था “अगर आज हिंदी भाषा मान ली गई तो इसलिए नहीं कि वह किसी प्रांत विशेष की भाषा है, बल्कि इसलिए कि वह अपनी सरलता, व्यापकता तथा क्षमता के कारण सारे देश की भाषा है ।”
हिंदी और भारतीय भाषाओं के संवर्धन एवं विकास में दक्षिस भारत के संतों, मनीषियों आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है । यहाँ के अनेक साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य की सभी विधाओं पर उत्कृष्ट साहित्य की रचना की है । उनके कृतित्व व व्यक्तित्व से भारतीय संस्कृति, साहित्य, भाषा और कला को संबल मिला है जिससे जन-साधारण लाभान्वित हुआ है । हिंदी प्रचार-प्रसार के कार्य में स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है । तमिलनाडु, केरल, आंद्र प्रदेश, कर्नाटक आदि प्रांतों की हिंदी की स्वैच्छिक संस्थाओं ने इस संबंध में अपनी विशिष्ट भूमिका निभाई है । इन संस्थाओं के माध्यम से हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं का पारस्परिक आदान-प्रदान, समन्वय एवं सामंजस्य बढ़ा है । परिणामस्वरूप हिंदीतर भाषा लोगों में हिंदी के प्रति इन संस्थाओं से जुड़े व्यक्तियों ने जिस निष्ठा एवं समर्पणभाव से राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य को आगे बढ़ाया है, उसके लिए उनकी जितनी प्रशंसा की जाए, कम है ।
मैं मानता हूँ कि कोई भी राष्ट्र अपना भाषा के बिना गूंगा हो जाता है । विचारों की अभिव्यक्ति रुक जाती है । कोई भी लोकतांत्रिक व्यवस्था लोकभाषा के अभाव प्रभावहीन हो जाता है । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हमने लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाई है । हमारी व्यवस्था लोक-कल्याणकारी है । सरकार की कल्याणकारी योजनाएं तभी प्रभावी मानी जाएंगी जब आम जनता उनसे लाभान्वित होगी । इसके लिए आवश्यक है कि शासन का काम-काज आम जनता की भाषा में निष्पादित किया जाए ।
एक जनतांत्रिक देश की सरकार और शासन को, जनता की भावनाओं के प्रति निरंतर सजग रहना पड़ता है । शासन एवं प्रशासन और जनता के मध्य संपर्क के लिए भाषा का बहुत ज्यादा महत्व है । शासन के कार्यक्रमों की सफलता या विफलता तथा शासन की छवि, इस पर निर्भर होते हैं कि उन्हें जनता कि कितना सहयोग मिलता है । हिंदी देश या प्रांतों की सीमाओं से बंधी नहीं है । यह एक उदारशील भाषा है जो अन्य भाषाओं से नित नए शब्द ग्रहण कर और अधिक संपन्न हो रही है । इससे हिंदी का विकासोन्मुखी रूप प्रकट होता है । इसे देश के विकास के सभी पहलुओं से जोड़ना है । अतः यह आवश्यक है कि विभिन्न कार्यक्षेत्रों से संबंधित विषयों के अनुरूप हिंदी में कार्यालय-साहित्य का निर्माण हो ।
संघ के राजकीय कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाना हमारा संवैधानिक व नैतिक दायित्व है । केंद्रित कार्यालयों, उपक्रमों, बैंकों आदि में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाना हमारा संवैधानिक व नैतिक दायित्व है । केंद्रीय कार्यालयों, उपक्रमों, बैंकों आदि में हिंगी के प्रयोग को बढ़ाने के लिए राजभाषा विभाग द्वारा विभिन्न योजनाएँ चलाई जाती हैं । प्रतिवर्ष एक वार्षक कार्यक्रम भी जारी किया जाता है । केंद्रीय सरकार के कार्यालयों में हिंदी का प्रयोग क्रमिक रूप से बढ़ रहा है लेकिन इसमें और तेजी लाने की आवश्यककता है । राजभाषा विभाग इस दिशा में प्रयत्नशील है । मुझे विश्वास है कि आप सभी के सहयोग से लक्ष्यों की प्राप्ति की प्राप्ति हो सकेगी ।
आज का युग सूचना प्रौद्योगिकी का युग है । हर क्षेत्र में इसका प्रयोग पढ़ता जा रहा है । हिंदी भाषा का प्रयोग बढ़ता जा रहा है । हिंदी भाषा का प्रयोग बढ़ाने के लिए भी सूचना प्रौद्योगिकी को अपनाना जरूरी हो गया है । अब तक कंप्यूटर पर हिंदी के प्रयोग के संबंध में आती रही अधिकांश समस्याओं का कारण मानक भाषा एनकोडिंग यानि यूनिकोड से भिन्न एनकोडिंग प्रयोग रहा है । आज के कंप्यूटर पर यूनिकोड में हिंदी प्रयोग करने की प्रभावी सुविधा उपलब्ध है । आवश्यकता है इन सुविधाओं के प्रयोग करने संबंधी जागरूकता की । अंग्रेजी प्रयोग को सूचना प्रौद्योगिकी में हुए विकास का पूरा लाभ मिला है । हिंदी प्रयोग के लिए भी ये सब सुविधाएँ उतनी ही सहजता से उपलब्ध हो सके इसके लिए अधिकारियों एवं विद्वानों को लेकर तीन समितियाँ गठित की गई है । ये समितियाँ हिंदी प्रयोगकर्ता की साफ्टवेयर संबंधी आवश्यकताओं की प्रभावी पूर्ति एवं हिंदी प्रयोगकर्ता में तकनीकी प्रयोग संबंधी जागरूकता पैदा करने के संबंध में सुझाव देंगी । मुझे यकीन है कि इन सुझावों पर अमल हिंदी प्रयोगकर्ता तक सूचना प्रौद्योगिकी में हुए विकास के लाभ को पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान होगा ।
यह अच्छी बात है कि हम हर क्षेत्र में विशेष उपलब्धियाँ हासिल करने वालों को सम्मानित करते हैं । सम्मेलन में आज कई संगठनों ने पुरस्कार प्राप्त किए हैं । मैं पुरस्कार प्राप्त करने वालों को पुनः बधाई देता हूँ । पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं का यह दायित्व बनता है कि वे अपने पूरे संगठन में राजभाषा हिंदी के प्रयोग-प्रसार को स्थायी रूप दें और अन्य संगठनों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करें । शेष संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों के अपेक्षा है कि वे संविधान द्वारा सौंपे गए इस दायित्व का निर्वाह उसी निष्ठा और तत्परता से करें जिस निष्ठा से वि अपने अन्य दायित्वों को निभाते हैं ।

अपने अध्यक्षीय भाषण में सचिव, राजभाषा विभाग डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में हिंदी के भविष्य को लेकर चिंता के स्वर सर्वत्र सुनाई पड़ रहे हैं, मगर इस संबंध में किसी चिंता या परेशानी की जरूरत नहीं है । जब तक भारतीय संस्कृति का अस्तित्व रहेगा, तब तक हिंदी और भारतीय भाषाएँ जिंदा रहेंगी । आज विदेशी मुल्क हमारे देश की ओर आकर्षित हो रहे हैं । बहु-राष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत बहुत बड़ा बाजार है । ग्रामीण जनता के साथ उनकी भाषा में बातचीत करने में ही इन कंपनियों की सफलता निर्भर करेगी । इस आलोक में भारतीय भाषाओं का भविष्य उज्जवल है ।


केंद्रीय विद्यालय की नन्हीं छात्राओं द्वारा भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ । राजभाषा विभाग के सचिव डॉ. प्रदीप कुमार जी की अध्यक्षता में संपन्न उद्घाटन सत्र में राजभाषा विभाग के संयुक्त सचिव श्री डी.के. पांडेय जी ने स्वागत भाषण दिया । जिपमेर के निदेशक डॉ. के.एस.वी.के. सुब्बाराव जी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित किया । दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में राजभाषा कार्यान्वयन की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट डॉ. वी. बालकृष्णन, उप निदेशक (कार्यान्वयन) ने प्रस्तुत की । अंत में केंद्रीय विद्यालय, पुदुच्चेरी के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की ।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता राजभाषा विभाग के सचिव डॉ. प्रदीप कुमार जी ने किया । विचार-विमार्श पर केंद्रित इस सत्र में डॉ. बालशौरि रेड्डी जी ने तमिलनाडु में हिंदी के उद्भव और विकास पर तथा डॉ. एम.के. श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (वि.प्र.), ने भाषा, संस्कृति, समाज और स्वास्थ्य – एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर व्याख्यान दिए । इसी सत्र में दक्षिण क्षेत्र में राजभाषा कार्यान्वयन की रिपोर्ट डॉ. विश्वनाथ झा, उप निदेशक (कार्यान्वयन) ने प्रस्तुत की । अंत में डॉ. वी. बालकृष्णन, उप निदेशक (कार्यान्वयन) के धन्यवाद ज्ञापन के साथ सम्मेलन सुसंपन्न हुआ ।
दि.9 अक्तूबर, 2009 को पुदुच्चेरी में क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन के अवसर पर माननीय गृह राज्य मंत्री, श्री अजय माकन जी के करकमलों से राजभाषा पुरस्कार (वर्ष 2008-09) प्राप्त करनेवाले कार्यालयों की सूची इस प्रकार है ।
दक्षिण क्षेत्र (आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक)
सरकारी कार्यालय वर्ग
राष्ट्रीय रेशमकीट बीच संगठन, बैंगलूर – प्रथम
कुक्कुट परियोजना निदेशालय, हैदराबाद – द्वितीय
मुख्य नियंत्रण सुविधा, अंतरिक्ष विभाग, हासन – तृतीय
उपक्रम
भारतीय कपास निगम लिमिटेड, शाखा कार्यालय, आदिलाबाद – प्रथम
प्रतिभूति मुद्रणालय, हैदराबाद – द्वितीय
भारत संचार निगम लि., विजयवाडा – तृतीय
बैंक
कार्पोरेशन बैंक, आंचलिक कार्यालय, हुबली – प्रथम
कार्पेरेशन बैंक, आंचलिक कार्यालय, उडुपि – द्वितीय
भारतीय स्टेट बैंक, स्थानीय प्रधान कार्यालय, हैदराबाद – तृतीय
नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति
भद्रावती-शिमोगा (सरकार कार्यालय) – प्रथम
हैदराबाद (बैंक) – द्वितीय
बैंगलूर (कार्यालय) – तृतीय
दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र (तमिलनाडु, केरल, पांडिच्चेरी एवं लक्ष्यद्वीप केंद्रशासी प्रदेश)
सरकारी कार्यालय
मुख्य आयकर आयुक्त का कार्यालय, तिरुवनंतपुरम – प्रथम
राष्ट्रीय कैडेट कोर निदेशालय, केरल और लक्षद्वीप, तिरुवनंतपुरम – प्रथम
मुख्य आयकर आयुक्त का कार्यालय, कोचिन – तृतीय
उपक्रम
प्रधान महाप्रबंधक, भारत संचार निगम लिमिटेड, कोलिक्केड – प्रथम
हिंदुस्तान न्यूजप्रिंट लिमिटेड, कोट्टयम - द्वितीय
हिंदुस्तान इन्सेक्टिसाइड्स लिमिटेड, कोचिन – तृतीय
बैक
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, क्षेत्रीय कार्यालय, एरणाकुलम – प्रथम
सिंडिकेट बैंक, क्षेत्रीय कार्यालय, कोयंबत्तूर – द्वितीय
कार्पोरेशन बैंक, अंचल कार्यालय, कोचिन – तृतीय
नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति
कालीकट (कार्यालय) – प्रथम
चेन्नै (बैंक) – द्वितीय
पुदुच्ची (कार्यालय) – तृतीय

Sunday, October 4, 2009

बाढ़-पीड़ितों को तुरत मदद जरूरी

आंध्र, उत्तर कर्नाटक, दक्षिण पश्चिम महाराष्ट्र एवं गोवा प्रदेश के कई इलाके भयानक जल-प्रलय से पीड़ित हुई हैं । 100 साल में कभी इतनी भीषण बाढ़ इस इलाके में नहीं हुई थी । स्थानीय मीडिया के पूरी क्षेत्रीय चेतना के कारण तथा राष्ट्रीय मीडिया की उदासीनता के कारण देश-विदेश के कई लोग इस उत्पात की जानकारी तुरंत हासिल न कर पाए हैं, इस कारण बाढ़ पीड़ित लाखों लोग जो निराश्रय होकर, खाना, पानी तक के लिए तरस रहे हैं, मदद की राह देखते रह गए हैं, इनकी मदद के लिए मानवीयतापूर्ण तुरत मदद की जरूरत है ।

Tuesday, September 29, 2009

कविता

हृदय काश पत्थर का होता

- महेश चंद्र गुप्त खलिश

दर्द की ऐसे घात न होती
नैनों से बरसात न होती
ठंडी सहमी रात न होती
हृदय काश पत्थर का होता

दुनिया आखिर बहुत पड़ी है
तुमसे ही क्या एक कड़ी है
मगर मुसीबत यही बड़ी है
हृदय काश पत्थर का होता

हम भी इठलाते- लहराते
चोट प्यार की तुरत भुलाते
किसी और से नेह लगाते
हृदय काश पत्थर का होता

ऐसा हृदय तुम्हीं ने पाया
वादा तुमने नहीं निभाया
छुआ न तुमको ग़म का साया
हृदय काश पत्थर न होता.

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड में हिंदी पखवाड़ा संपन्न

हम अपने देश की ‘राष्‍ट्रभाषा-हिंदी’ सीखें - डॉ. भवानी
हिंदुस्‍तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड, तिरूनेलवेली डिपो में दि, 25. 9. 2009 को प्रबंधक श्री दामोदरन की अध्‍यक्षता में हिंदी पखवाड़े से संबंधित पुरस्‍कार वितरण का आयोजन हुआ। मुख्‍य अतिथि के रूप में आमंत्रित मनोनमय सुंदरनार विश्‍वविद्यालय की हिंदी विभागाध्‍यक्ष डॉ. भवानी ने हिंदी की विशेषता के संबंध में सारगर्भित भाषण देकर स्‍टाफ सदस्‍यों को हिंदी सीखने केलिए प्रेरित किया तथा विजेताओं को पुरस्‍कार प्रदान किये। इस अवसर पर श्री नवनीतम द्वारा प्रस्‍तुत “मेरा भारत महान” कविता तथा श्री राजेंद्रन द्वारा “मातृभाषा व राष्‍ट्रभाषा की विशेषता” पर प्रस्‍तुत भाषण प्रमुख आकर्षण रहा ।


सब को हिंदी सीखनी चाहिए - आर राधाकृष्णन

हिंदुस्तान पेट्रोलियम का.लि, आंचलिक कार्यालय, चेन्नै में दि 1 से 15 सितंबर तक आयोजित विविध प्रतियोगिताओं से संबंधित पुरस्कार वितरण 16.9.2009 को श्री आर राधाकृष्णन, महाप्रबंधक की अध्य‍क्षता में संपन्न हुआ । ‍सरस्वती वंदना, कविता पाठ, हास्य स्किट, मातृभाषा की विशेषता पर रोचक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया ।
श्री आर श्रीधर, उप महाप्रबंधक - वित्‍त,श्री चौधरी उप महाप्रबंधक – रिटेल उन्‍नयन , श्री सादु सुंदर,मुख्‍य प्रबंधक (मा सं) ने विजेताओं को पुरस्‍कार प्रदान किये। डा0 एस.बशीर, उप प्रबंधक रा0भा0 ने कार्यक्रम का संचालन किया। सुश्री डी. अर्चना, हिंदी सहायिका ने कार्यक्रम का आयोजन किया।

Thursday, September 24, 2009

ग़ज़ल

बाज़ार






मृत्युंजय कुमार, इंदौर

उठती है निगाह जिधर बाज़ार नज़र आता है
कोई बिकता हुआ कोई खरीदार नज़र आता है

सिर्फ जरूरतों के उसूल पर जीता है जमान,
जो न किसी काम का वो बेकार नज़र आता है

आते-जाते हर शख्स की है निगाह मुझ पर,
शायद मुझमें कोई कारोबार नज़र आता है

ख्वाहिशों के दश्त में हर आदमी गुम है,
रूह है गिरवी जेबों में उधार नज़र आता है

Tuesday, September 15, 2009

आलेख

निराला जी के काव्य में नारी का चित्रण
- एम. रोशनी, कोयंबत्तूर


हिन्दी के आधुनिक कवियों की सूची बनाए तो उसमें पहले निराला का नाम ज़रूर लिखना पड़ेगा। वे पहले कवि हैं जिन्होंने कविता को छन्द-बंधन से मुक्त किया, उसके चरणों को स्वच्छन्द गति दी। उन्होंने छन्द को तोड़ा भी और छोड़ा भी नहीं। उनका मुक्त छन्द हिन्दी कविता का अपना छन्द बन गया। उनकी कविताओं में तमाम साहित्यिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक आन्दोलन तथा आलोचनात्मक सिद्धान्त सहज भाव से समाहित है। निराला का संपूर्ण जीवन संघर्षों की एक कहानी है।

काव्य में नारी के अनेक रूप होते हैं। कवियों के अनुसार नारी भोग्या, सुन्दरी, शक्तिरूपिनी, सौंदर्या, दयनीया, परिश्रमी, संघर्षमयी, प्रेरणा स्रोतस्विनी है। वे तो सिर्फ उच्च वर्ग की नारी को ही नहीं, भिखारिन, दलित, मज़दूर, पीड़ित, अछूत नारियों का भी हित चिंतन करने वाले व्यक्ति थे। नारी को महत्वपूर्ण स्थान देने के कारण ही उनके अधिकतर उपन्यास तथा कहानियों के शीर्षक भी नायिका के आधार पर हैं।

काव्य में उनको ध्यान का केन्द्र है नारी का सौन्दर्य। अनेक स्वच्छन्तावादी कवियों की रचनाओं में जिस अतृप्ति अथवा काल्पनिक कामेच्छापूर्ति का झलक मिलती है। वह निराला के काव्य में कम है। सुन्दरता को भी कामवासना से अलग करके देखना एक कला है। स्फटिकशिला में निराला द्वारा पानी में भीगी नारी का सुन्दर चित्रण ऐसा दिया गया है -

ऑंख पड़ी युवति पर, आई थी वो नहाकर
गीली धोती सटी हुई भरी देह में मधुर
उसे पुष्ट स्तन, दुष्ट मन को मरोड़कर
आयत दुगों का मुख खुला हुआ छोड़कर
बदन कहीं से नहीं कांपता,
कुछ भी संकोच नहीं ढांपता।
(स्फटिकशिला, पृ. 59)

निराला ने नारी के बाहरी सौंदर्य को ही देखा नहीं, उन्होंने नारी के हृदय के अंदर छिपा हुआ दुख और निराशा को भी छोड़ा नहीं। निराला के लिये नारी इस धरती पर रहने और विहार करने वाली अस्थि-माँस की नारी है। अगर नारी को कुछ कमी हो गया तो उसके जीवन में दुख का अंत नहीं, उस जीवन भर भोगना पड़ता है। इस प्रकार के कानी के दुख को निराला ने व्यक्त किया है। क्योंकि उसके लिए विवाह एक बडा प्रश्न बनकर उसके सामने खड़ा हो जाता है, पर उसका हृदय तो दूसरी सामान्य नारियों जैसा कल्पना में डूबा रहता है।

औरत की जात रानी ब्याह भला कैसे हो
कानी जो है वह
सुनकर कानी का दिल हिल गया।
कांपे कुल अंग
दाईं ऑंख से
ऑंसू भी वह चले माँ के दुख से
लेकिन वह बाईं ऑंख कानी
ज्यों-की-त्यों रह गई रखती निगरानी

(नये पत्तो - रानी और कानी, पृ.सं. 16)

निराला ने प्राकृतिक उपादानों में चेतना के आरोप से सौन्दर्य की सृष्टि की है जो अद्भुत है, मादक है। प्रकृति में जहाँ चेतना का आरोप हुआ है वह नारी के रूप में उभर कर आया है। वस्तुत: समस्त छायावादी काव्य में जहाँ भी प्रकृति में चेतना का आरोप हुआ है, वह नारी रूप में प्रस्तुत हुई है और कवियों ने सौन्दर्य का जम कर वर्णन किया है। निराला ने प्रकृति में चेतना के आरोप से नारी सौन्दर्य का अद्भुत वर्णन किया है। 'सन्ध्या सुन्दरी' नामक कविता में वे शाम के समय को नारी के साथ तुलना करके देखते हैं।

दिवसावसान का समय
मेघमय आसमान से उतर रही है
वह सन्ध्या सुन्दरी परी-सी
धीरे धीरे धीरे।

उसी प्रकार 'जूही की कली' में भी निराला की सौन्दर्य चेतना का दिग्दर्शन होता है। इसके कुछ पंक्तियों में ही सौन्दर्य का पारावार है और कवि ने प्रकृति एवं नारी के संपूर्ण सौन्दर्य का अंकन कर दिया है।

विजन वन वल्लरी पर
सोती थी सुहाग भरी स्नेह स्वप्न मग्न
अमल कोमल तन तरुणी जूही की कली
दुग बन्द किए पत्रांक में।

निराला की सहानुभूति सिर्फ सुन्दर नारियों के प्रति ही नहीं किसान, मज़दूर, भिखारिन, विधवा आदि शोषित समाज के साथ भी रही है, जिनके विजय या मुक्ति के निराला प्रारंभ से कामना करते आये हैं। वे दलित, पीड़ित, अछूतों के लिए भी हित चिंतन करते थे।

भारतीय हिन्दु समाज ने यहाँ की विधवाओं के साथ जो अत्याचार किया है, वह किसे से छिपा नहीं है। भारतीय विधवाएँ अपनी समस्त आकांक्षाओं को अपने में समेट सिसकी भरती हुई अपने कोमल फूल-से शरीर को अतृप्ति के अग्नी में झोंक देते हैं। प्रकृति में व्याप्त नारी मूर्ति के रूप लावण्य के भीतर कवि को जीवन की यातना से त्रस्त एवं भाग्य की विडम्बना की मारी नारी का यथार्थ चित्र दीख पड़ता है और वह उसी तन्मयता के साथ इसका भी चित्रांकन करता है, विधवा की कुछ पंक्तियाँ द्रष्टव्य हैं -
वह इष्टदेव के मंदिर की पूजा-सी
वह दीपशिखा-सी शांत भाव में लीन
वह क्रूर काल ताण्डव की स्मृति रेखा-सी
वह टूटे तरु की छुटी लता-सी दीन
दलित, भारत की ही विधवा है।
(विधवा)

निराला ने विधवा के वैधव्य-जनित दुख को साकार कर दिया है। नारी की हीन-दशा को सामाजिक पतन मानते हैं। उनका विश्वास है कि नारी मुक्ति के बिना, जाति, समाज और राष्ट्र का उध्दार कभी संभव नहीं हो सकता। वे मजदूरनी के परिश्रम का वर्णन को एक कविता में व्यक्त किया है। उस मजदूरनी तो रूई के समान भू को जलाने वाली तत्प लू में भी अपने काम में लगी है। वह अपने पेट के भूख को शांत कराने के लिए उस धूप को तुच्छ मानकर परिश्रम करती है। वह कहीं भी आश्रय नहीं ले सकती, क्योंकि यह उसकी विवशता है।

''वह तोड़ती पत्थर
देखा उसे मैंने इलाहाबाद के पथ पर
वह तोड़ती पत्थर
कोई न छायादार
पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार,
श्याम तन भर बंधा यौवन,
नत नयन, प्रिय-कर्म-रत-मन,
गुरु हथौड़ा हाथ
करती बार बार प्रहार।''

(अनामिका-तोड़ती पत्थर, पृ. 81)

निराला जी का कहना है कि नारी संपूर्ण समाज की निर्मात्री है, इसलिये स्त्रियाँ यदि अनपढ़ रह गईं, यदि उन्हीं की जबान मंजी तो बच्चा पढ़कर भी कुछ कर नहीं सकता। मौलिकता का मूल बच्चे की माता है। नारी विषयक दासता के प्रबल विरोधी हैं। उनका संदेनशील मन नारी के भोले भाले पुराने परंपरागत विचारों को लेकर दुखी होता था। वे नारी अत्याचारों के संदर्भ में विद्रोह भी करने लगता है। सति के अतिरिक्त विष्व में और कुछ नहीं। आत्म-समर्पण भारतीय नारी की सर्वोत्कृष्ट विभूति है। इस विचार पर व्यंग्यात्मक ढंग से उन्होंने ऐसा लिखा है -

''उसमें कोई चाह नहीं है
विषय वासना तुच्छ, उसे कोई परवाह नहीं है
उसकी साधना
केवल निज सरोजमुख पति को ताकना।''
(बहू)

इन्होंने व्यक्तिगत संकीर्ण छंदों का परित्याग तो किया हो, सडे सामाजिक बन्धनों की भी अवहेलना की। अपनी कन्या सरोज के विवाह में भी इन्होंने किसी को निमंत्रण नहीं दिया। कुछ ही साहित्यिकों के सामने स्वयं निराला ने पुरोहित का आसन ग्रहण किया था। इन सामाजिक बन्धनों को नकारते हुए कहते हैं -

''तुम करो ब्याह तोड़ता नियम
मैं सामाजिक योग के प्रथम
लग्न के पढूँगा स्वयं मंत्र
यदि पंडित जो होंगे स्वतंत्र।''
(सरोज स्मृति)
नारी मुक्ति के सन्दर्भ में निराला का साहित्य अत्यन्त महत्वपूर्ण है। उनके काव्य में नारी की सामाजिक परतंत्रता का विरोध मुखरित हुआ है। निराला का विश्वास है कि नारी स्वच्छन्द समीर के समान है। हमेशा के लिए निराला नारी स्वतंत्रता के समर्थक हैं -

तोड़ो, तोड़ो, तोड़ो कारा
पत्थर की निकली फिर गंगा जल धारा
गृह-गृह की पार्वती
पुन: सत्य सुन्दर शिव की सँवारती।
(अनामिका)

निराला जी के समस्त साहित्य को भी देखें तो हमें यह पता चलेगा कि निराला ने नारी को भोग्या न मानकर सदैव और सर्वत्र प्रेरणा का स्रोत माना है। इनके विचार और साहित्य के कारण ही ये 'क्रान्तिकारी निराला' माने जाते हैं।

Sunday, September 13, 2009

हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ

हिंदी दिवस का संकल्प


भारतीय संस्कृति एवं विरासत की रक्षा तथा भारत की सार्थक उन्नति के लिए संकल्पबद्ध भारतीय संविधान की मूलभावना भारतीय भाषाओं की श्रीवृद्धि के पक्ष में है । आइए आज हम संकल्प करें भारतीय भाषाओं के विकास के लिए प्रतिबद्ध होने का, भारतीय भाषाओं का निष्ठापूर्वक प्रयोग, प्रचार एवं प्रसार करने का । हमारे प्रयासों से जनमानस की भाषाएं विकसित हो, भारत की एकता एवं अखंडता बनी रहे ।

हिंदी का अभिवंदन

डा.स.बशीर चेन्नै


वीणा का नाद है
वाणी का वाद है
सब का आकर्षण है
राष्ट्र की शान है

समाज का दर्पण है
साहित्य का सृजन है
ज्ञान की धरा है
सब ने इसे वारा है -ये हिंदी है
विनय की भाषा है
संस्कृति की परिभाषा है
आत्मा का निवेदन है
दिलों की धड़कन है-ये हिंदी है

सब वाखिफ हैं इसकी गरिमा
विश्व में ये भाषा सरताज है
इस का भविष्य है बड़ा उज्ज्वल
करते हैं इस भाषा का शत-शत
अभिवंदन

शत-शत नमन-हिंदी को

मु.सादिक चेन्नै

तन-मन की भाषा है हिंदी
भारत की आशा है हिंदी
भारत का दर्शन है हिंदी
हमसब संप्रेषण हैं हिंदी

सभी भाषाओँ की आकर्षण है हिंदी
भारत का उत्कर्षण है
राष्ट्र चेतना का स्वर है
हिमालय का सर है –हिंदी

शायरों के दिलों की धड़कन
भक्तों के लिए नमन है
कविओं का अमन है
हरा भरा देश का चमन है हिंदी


मेल्बर्न में हिन्दी दिवस

-हरिहर झा

साहित्य-सन्ध्या के तत्वावधान में ५ सितम्बर शनिवार को क्यू-लाइब्रेरी में हिन्दी दिवस मनाया गया । इसके प्रथम चरण का संचालन प्रोफेसर नलिन शारदा ने किया । श्री दिनेश जी श्रीवास्तव ने दीप प्रज्ज्वलित किया । मंच की अध्यक्षता करते हुये अपने भाषण में उन्होने संस्कृति को बनाये रखने के लिये हिन्दी की आवश्यकता पर बल दिया । उन्होने बताया कि आस्ट्रेलिया में हिन्दी को उसका स्थान दिलाने के लिये किन किन कठिनाइयों से गुजरना पड़ा ।

तत्पश्चात सुभाष शर्मा ने मधुर कंठ से मातृभाषा हिन्दी पर गीत गाया व हिन्दी दिवस के उपलक्ष में कवितायें सुनाई ।मैंने एक हिन्दी-गज़ल सुनाई व ’बिखरा पड़ा है’ - नवगीत का पाठ किया । राजेन्द्र चोपड़ा ने रक्षा-बन्धन के पर्व पर इस युग की मजबूर परिस्थितियों की पृष्ठ-भूमि में भाई-बहन के प्रेम-भाव का ह्दय विदारक चित्र खींचा । प्रोफेसर सुरेश भार्गव ने हास्य और करूण रस का अनोखा संगम कर दिया जब बताया कि क्या हुआ जब एक सिपाही को कविता लिखने का शौख चर्राया ।

दूसरा सत्र – “अपने लोग –अपनी बातें” के संचालन का कार्य-भार मुझे सौपा गया । मैंने फादर कामिल बुल्के के हिन्दी प्रेम, तुलसी-प्रेम व उनके हिन्दी-साहित्य में योगदान के विषय में बताया ।

रतनजी मूलचन्दानी ने कुछ चुटकुलों से हँसाने के पश्चात ’अभिव्यक्ति’ में प्रकाशित मुकेश पोपली की कहानी ’अपील’ की विवेचना की तथा बताया कि किस तरह छोटे छोटे प्रयास किसी गरीब की जिन्दगी बदलने में सहायक हो सकते हैं और छोटे छोटे प्रयास दीन-हिन बनी हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में सहायक हो सकते हैं ।

सुमनजी ने एक जादूगर के माध्यम से आधुनिक युग की स्वार्थी भावनाओं के कटु-यथार्थ पर व्यंग्य किया । अनीताजी ने कहा कि भारत में जो विविधता में एकता दिखाई पड़ती है वह अन्यत्र दुर्लभ है और इस विषय में उन्होने मातृभाषाओं की भूमिका को सराहा । सर्वेश कुमार सोनी की कविता के बाद हरिजी झुल्का ने एक जवाब के साथ सौ सवाल खड़े हो जाने की परिस्थीति का चित्रण किया । राजेश रामनाथन ने “टू द साईलेन्ट ग्रेव” कविता सुनाई जिसके प्रत्युत्तर में मुझे अपनी दो पंक्तिया याद आ गई – “काल ने विकराल सी खींची जो रेखा है । मौत को निकट तक आते हुये देखा है ।“

सुभाष शर्मा के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ गुरजिन्दर जी कौर ने देश-प्रेम के गीत से कार्यक्रम का समापन किया ।

अपना हर पल है हिन्दीमय

- आचार्य संजीव सलिल

अपना हर पल
है हिन्दीमय
एक दिवस
क्या खाक मनाएँ?
बोलें-लिखें
नित्य अंग्रेजी
जो वे
एक दिवस जय गाएँ...
निज भाषा को
कहते पिछडी.
पर भाषा
उन्नत बतलाते.
घरवाली से
आँख फेरकर
देख पडोसन को
ललचाते.
ऐसों की
जमात में बोलो,
हम कैसे
शामिल हो जाएँ?...
हिंदी है
दासों की बोली,
अंग्रेजी शासक
की भाषा.
जिसकी ऐसी
गलत सोच है,
उससे क्या
पालें हम आशा?
इन जयचंदों
की खातिर
हिंदीसुत
पृथ्वीराज बन जाएँ...
ध्वनिविज्ञान-
नियम हिंदी के
शब्द-शब्द में
माने जाते.
कुछ लिख,
कुछ का कुछ पढने की
रीत न हम
हिंदी में पाते.
वैज्ञानिक लिपि,
उच्चारण भी
शब्द-अर्थ में
साम्य बताएँ...
अलंकार,
रस, छंद बिम्ब,
शक्तियाँ शब्द की
बिम्ब अनूठे.
नहीं किसी
भाषा में मिलते,
दावे करलें
चाहे झूठे.
देश-विदेशों में
हिन्दीभाषी
दिन-प्रतिदिन
बढ़ते जाएँ...
अन्तरिक्ष में
संप्रेषण की
भाषा हिंदी
सबसे उत्तम.
सूक्ष्म और
विस्तृत वर्णन में
हिंदी है
सर्वाधिक
सक्षम.
हिंदी भावी
जग-वाणी है
निज आत्मा में
'सलिल' बसाएँ...